अमेरिका में बसे महेंद्र शर्मा बने गांव गुड़ा रामाजी के ‘भामाशाह’ — 29.50 लाख से चार कमरों का निर्माण, शिक्षा व जनकल्याण के क्षेत्र में मिसाल कायम

पाली : गांव गुड़ा रामाजी में समाजसेवा की एक नई मिसाल पेश करते हुए भामाशाह महेंद्र कुमार शर्मा पुत्र शंकरलाल शर्मा ने अपने निजी खर्च से राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, गुड़ा रामाजी में चार नवनिर्मित कक्षों का निर्माण कार्य पूरा करवाया, जिसकी लागत लगभग 29.50 लाख रुपये रही। मंगलवार को इन कक्षों का विधिवत उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया।
महेंद्र शर्मा ने कहा कि “शिक्षा जीवन का अमूल्य अंग है, बच्चों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं देने से ही देश का भविष्य मजबूत बनेगा।” उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई और खेल दोनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय में इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।

महेंद्र शर्मा अमेरिका में 21 वर्ष और अफ्रीका में 13 वर्ष तक रह चुके हैं। वर्तमान में उनका ट्रस्ट अमेरिका, अफ्रीका और भारत तीनों देशों में सामाजिक व वित्तीय सहयोग के क्षेत्र में सक्रिय है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में उनके ट्रस्ट द्वारा कई जनकल्याणकारी कार्य करवाए गए हैं — श्मशान घाटों का निर्माण (केरली, टोकरला, रामाजी गुड़ा में) नदी किनारे कुएं का निर्माण (6 लाख रुपये की लागत से) टोकरला गांव में गौशाला का निर्माण, ग्रामीण जनोपयोगी कार्यों में सतत सहयोग

गांव के लोगों की मांग पर शर्मा ने घोषणा की कि यदि अगले छह माह में अस्पताल का निर्माण नहीं होता, तो वे स्वयं अपने खर्च से अस्पताल बनवाएंगे। उन्होंने कहा कि “हर व्यक्ति को अपनी आय का एक अंश समाज सेवा और लोक कल्याण में लगाना चाहिए।” महेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके बाद उनके पुत्र रौनक शर्मा भी ट्रस्ट की सामाजिक सेवाओं को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि “हमारा ध्येय शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण को निरंतर गति देना है।”
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाध्यापक गिरधारी सिंह केरली, ठाकुर बहादुर सिंह, अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नेनाराम, पीईईओ सुमित्रा हंस, डॉ. प्रेमसिंह मेड़तिया, चम्पालाल मेघवाल, मनोज त्रिवेदी, हितेश सोनी, राजुभाई त्रिवेदी, कुंदन सिंह, भलाराम मेघवाल, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। गांव में भामाशाह की इस सेवा भावना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि प्रवासी भारतीय भी अपनी जड़ों से जुड़े रहकर अपने गांव और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।




