सोजत की मशहूर नैचरल मेहंदी पर मंडरा रहा खतरा, फास्ट कलर कोन बना जहर, लाखों किसानों की आजीविका पर संकट

पाली : राजस्थान के पाली जिले की पहचान और गौरव मानी जाने वाली विश्वप्रसिद्ध सोजत मेहंदी, जिसे हाल ही में भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त हुआ था, अब एक गंभीर संकट से गुजर रही है। बाजार में “नैचरल मेहंदी” के नाम पर खुलेआम बिक रहे रासायनिक फास्ट कलर कोन न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गए हैं, बल्कि इस पारंपरिक उद्योग की साख और इससे जुड़े लाखों किसानों की आजीविका पर भी गहरा असर डाल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सोजत, पाली, ब्यावर, राजसमंद सहित आसपास के क्षेत्रों में कई इकाइयाँ अवैध रूप से फास्ट कलर मेहंदी कोन तैयार कर रही हैं। इनमें पिक्रामिक एसिड, एसिड डाई और एजो डाई जैसे खतरनाक रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है — जो सामान्यतः कपड़ा रंगाई में उपयोग होने वाले औद्योगिक केमिकल हैं। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) द्वारा जारी IS-17318:2020 मानक के अनुसार इन रसायनों का मेहंदी उत्पादों में उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है, इसके बावजूद बाजार में इनका खुलेआम व्यापार जारी है।
इन फास्ट कलर कोन से कुछ ही मिनटों में गहरा रंग तो आ जाता है, लेकिन इसके बाद त्वचा में जलन, फफोले, एलर्जी और कई मामलों में स्थायी घाव व संक्रमण तक हो जाते हैं। हाल ही में बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें महिलाओं को फास्ट कलर कोन लगाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
7 लाख से अधिक किसानों की आजीविका पर असर
सोजत और आसपास के इलाकों में करीब 7 लाख से अधिक किसान और मजदूर मेहंदी की खेती व इससे जुड़े उद्योगों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। मगर फास्ट कलर कोन के बढ़ते चलन ने नैचरल मेहंदी की मांग में भारी गिरावट ला दी है। इसके चलते न केवल कीमतों में गिरावट आई है, बल्कि कई छोटे प्रोसेसिंग यूनिट्स बंद होने की कगार पर हैं।
विदेशी बाजारों में भी भारतीय मेहंदी की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं, जिससे निर्यात कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
संगठन ने जिला प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
“सोजत मेहंदी ‘क’ वर्ग दलाल विकास समिति” ने जिला कलेक्टर, पाली को ज्ञापन सौंपकर फास्ट कलर कोन के अवैध निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है। समिति ने बताया कि औषधि विभाग की पूर्व जांचों में भी इन उत्पादों में प्रतिबंधित रसायन पाए गए थे, पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। समिति ने प्रशासन से पुलिस और औषधि विभाग के संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे निर्माताओं के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और कठोर कार्रवाई करने की अपील की है।
उपभोक्ताओं से की अपील
संगठन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे “100% नैचरल मेहंदी” का ही प्रयोग करें और “फास्ट कलर” या “इंस्टेंट कलर” लिखे उत्पादों से बचें।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक मेहंदी का रंग धीरे-धीरे चढ़ता है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित और परंपरागत भारतीय सौंदर्य का प्रतीक है।



