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पाली : बाल अधिकार संरक्षण पर जिला स्तरीय सम्मेलन, बच्चों को साइबर बुलिंग, शोषण और मानसिक हिंसा से बचाने पर जोर

पाली : जिले में बच्चों की सुरक्षा, अधिकार संरक्षण और साइबर बदमाशी की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय बाल अधिकार सम्मेलन शुक्रवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित हुआ। सम्मेलन में दिल्ली से आई विशेषज्ञ टीम ने शिक्षकों, बच्चों, अभिभावकों और प्रशासनिक अधिकारियों को बाल सुरक्षा कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और स्कूलों में सुरक्षित वातावरण निर्माण के लिए संवेदनशील किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कलक्टर एल.एन. मंत्री ने की। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की बुनियाद है। उन्होंने बाल्यावस्था में मानसिक पोषण और संवेदनशील माहौल को बढ़ावा देने पर बल दिया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव विक्रम सिंह भाटी ने कहा कि हर बच्चे को अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने ‘गुड टच-बैड टच’ की समझ, कानूनी सहायता के अधिकार और दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

पुलिस अधीक्षक आदर्श सिंधु ने कहा कि बच्चों को साइबर बुलिंग, एआई लिंक वीडियो और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि जिले में महिला-बाल डेस्क की स्थापना, पॉक्सो मामलों की त्वरित जांच और संवेदनशील पुलिसिंग के प्रयास जारी हैं।

बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेन्द्र पंड्या (पूर्व सदस्य, SCPCR) ने कहा कि भारत में बाल अधिकार संरक्षण एक संवैधानिक अधिदेश है, और एनसीपीसीआर (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) यह सुनिश्चित करता है कि सभी नीतियां संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (UNCRC) के सिद्धांतों के अनुरूप हों। उन्होंने स्कूलों में बच्चों के प्रति हिंसा, शारीरिक दंड और यौन शोषण को रोकने के लिए संस्थागत सुदृढ़ीकरण और विभागीय समन्वय को आवश्यक बताया।

एडवोकेट अंशिता सुराना, किशोर न्याय अधिनियम विशेषज्ञ, ने कहा कि जेजे एक्ट 2015 और पॉक्सो एक्ट 2012 के सही क्रियान्वयन के लिए शिक्षा, पुलिस, समाज कल्याण, स्वास्थ्य और न्याय विभागों के बीच साझा कार्ययोजना और जवाबदेही ढांचा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूलों में साइबर बुलिंग रोकथाम, रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल, और जीवन कौशल आधारित सुरक्षा शिक्षा को अनिवार्य करने की जरूरत बताई।

एनसीपीसीआर सलाहकार प्रेरणा कौशिक ने कहा कि बाल दुर्व्यवहार की रिपोर्टिंग और पीड़ितों की सहायता के लिए शिक्षकों, पुलिसकर्मियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण बेहद आवश्यक है। इस अवसर पर बाल अधिकारिता विभाग की उपनिदेशक टीना अरोड़ा, राजेश कुमार, प्रकाश अरोड़ा, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, अभिभावक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सम्मेलन का उद्देश्य था — बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और जवाबदेह शिक्षण वातावरण तैयार करना, जिसमें बाल अधिकार, साइबर सुरक्षा और भावनात्मक स्वास्थ्य सभी को समान प्राथमिकता दी जाए।

Rajasthan Today

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