संविधान दिवस पर ‘द यूथ ऑफ पाली’ की अनूठी पहल, शहर-गाँव में नुक्कड़ नाटकों से गूंजे संवैधानिक संदेश

पाली : संविधान दिवस के अवसर पर युवा शक्ति ने सामाजिक जागरूकता की मिसाल पेश की। ‘द यूथ ऑफ पाली’ समूह द्वारा बुधवार को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें संविधान की मूल भावना, सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया गया।
समूह के सदस्यों ने मानपुरा भाकरी गांव, लखोटिया गार्डन और भंसाली कॉलेज में नुक्कड़ नाटकों एवं स्किट का मंचन कर संविधान को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया। इसके साथ ही आकर्षक पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने लोगों का ध्यान खींचा।

नुक्कड़ नाटकों में जाति व्यवस्था की बेड़ियों, लैंगिक समानता, बेटियों की शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को मार्मिक शैली में प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने बताया कि समतामूलक और प्रगतिशील समाज का निर्माण तभी संभव है जब भेदभाव की प्रथा खत्म हो और बेटियों को शिक्षा के समान अवसर मिलें। प्रस्तुतियों के दौरान कलाकारों की प्रभावशाली संवादशैली व अभिनय ने दर्शकों को संदेश से गहराई से जोड़ दिया।
पूजा भंसाली, अजय कुमार, राहुल मेहरा, खुशी, सोनू, संजू, सुजल, सोहेल भाटी, सोहेल खान, देवराज, अजय वैष्णव और गौरव सहित कई युवा कलाकारों ने पूरे जोश के साथ प्रस्तुति दी। मानपुरा भाकरी गांव में दोपहर को और लखोटिया उद्यान में शाम को हुए मंचनों में स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। दर्शकों ने नाटकों की सराहना करते हुए सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प भी लिया।

‘द यूथ ऑफ पाली’ समूह पिछले कई वर्षों से शहर में हेलमेट जागरूकता अभियान, सामाजिक मुद्दों पर नाटक, वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों के लिए प्रसिद्ध रहा है। संविधान दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम समूह की सक्रियता और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक और सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। कार्यक्रम ने न केवल युवाओं की रचनात्मकता को उजागर किया, बल्कि पाली शहर और गांवों में संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का संदेश भी व्यापक रूप से फैलाया।



