पाली : कपड़ा उद्योग पर संकट गहराया, 700 इकाइयां बंद, 20 हजार श्रमिकों के सामने रोजगार का खतरा

पाली : सीईटीपी पदाधिकारियों पर कथित अनुचित दबाव के चलते सामूहिक पदत्याग के बाद पाली शहर का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट में पहुंच गया है। शहर की औद्योगिक गतिविधियों की जीवन रेखा माने जाने वाले कपड़ा उद्योग की 750 में से लगभग 700 इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जिससे करीब 18 से 20 हजार श्रमिकों के सामने जीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालत यह है कि कई परिवार रोजगार की तलाश में पलायन के लिए मजबूर होते दिख रहे हैं।
कपड़ा इकाइयों के बंद होने से औद्योगिक क्षेत्रों में पूरी तरह सन्नाटा छा गया है। इसका सीधा प्रभाव न सिर्फ श्रमिकों पर, बल्कि ट्रांसपोर्टर, किराना-सब्जी विक्रेताओं, भोजनालय संचालकों, चाय-नाश्ता बिक्री, हाथ-ठेली व्यवसायियों और टेम्पो-ट्रैक्टर चालकों तक पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। शहर की अर्थव्यवस्था एक तरह से ठप स्थिति में पहुंच गई है। इंटक जिला महामंत्री भंवर राव ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि
“राज्य की भाजपा सरकार नए रोजगार देने की बात करती है, जबकि पाली शहर में पहले से स्थापित उद्योग ही बंद होते जा रहे हैं। यह सरकार के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि वह सीईटीपी में चल रहे विवाद को तत्काल सुलझाए और बंद उद्योगों को चालू कर श्रमिकों को राहत दे। उन्होंने इसे जनहित का विषय बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की।
सीईटीपी पदाधिकारियों द्वारा 19 नवम्बर को दिए गए सामूहिक त्यागपत्र के बाद से संस्था पूरी तरह निष्क्रिय है। कुल 750 कपड़ा इकाइयों में से 700 इकाइयां संचालन बंद, केवल 50 इकाइयां निजी सीईटीपी प्लांट के जरिए संचालित स्थिति इतने दिनों से ज्यों की त्यों बनी रहने से उद्योग और श्रमिक दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
भंवर राव ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने श्रमिकों के हित में जल्द कदम नहीं उठाए, तो विभिन्न श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।



