220/118 ब्लड प्रेशर, जिंदगी और मौत के बीच जंग… सादड़ी अस्पताल की टीम ने बचाई मां और नवजात की जान

पाली। पाली जिले के राजकीय जनाना चिकित्सालय, सादड़ी में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सतर्कता, त्वरित निर्णय और समर्पण ने एक हाई रिस्क गर्भवती महिला और उसके नवजात को नया जीवन दिया। गर्भवती का ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर 220/118 तक पहुंच चुका था और पूरे शरीर में अत्यधिक सूजन थी। ऐसी गंभीर स्थिति में मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान पर संकट मंडरा रहा था, लेकिन अस्पताल की टीम ने समय रहते उपचार कर सुरक्षित प्रसव करवाकर एक बड़ी सफलता हासिल की।
जानकारी के अनुसार 25 वर्षीय कुसुम कुमारी, पत्नी ललित मेघवाल, निवासी गुड़ा कल्याण सिंह, को अत्यंत गंभीर अवस्था में राजकीय जनाना चिकित्सालय सादड़ी लाया गया। जांच में चिकित्सकों ने पाया कि उनका रक्तचाप सामान्य से कई गुना अधिक है और गर्भावस्था जटिल स्थिति में पहुंच चुकी है। खतरे को भांपते हुए चिकित्सकों ने तुरंत इसे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी घोषित कर आपातकालीन उपचार शुरू किया।
राजकीय जनाना चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेंद्र पुनमिया ने पूरी जिम्मेदारी संभालते हुए अनुभवी चिकित्सा दल के साथ सुरक्षित प्रसव की रणनीति बनाई। लेबर रूम में हर पल चुनौतीपूर्ण था, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने धैर्य, कुशलता और समन्वय के साथ स्थिति को नियंत्रित रखा।
इस सफल प्रयास में नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा भाटी, पुष्पा पालीवाल, भरत सोलंकी, दिव्येश पाल सिंह, संतोष, भूमिका, अतुल जैन, दीपिका तथा सफाई कर्मचारी प्यारी बाई की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने टीम भावना के साथ कार्य करते हुए मां और शिशु दोनों की जान बचाने में अहम योगदान दिया।
लेबर रूम के बाहर परिवार के सदस्य हर पल चिंता में डूबे भगवान से प्रार्थना कर रहे थे। जैसे ही चिकित्सकीय टीम ने बाहर आकर बताया कि “मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं”, पूरे परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने भावुक होकर डॉक्टरों और पूरे स्वास्थ्य स्टाफ का आभार व्यक्त किया।
यह सफलता केवल एक सुरक्षित प्रसव तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह साबित कर गई कि समय पर सही चिकित्सकीय निर्णय, विशेषज्ञ उपचार और टीमवर्क से सबसे जटिल हाई रिस्क गर्भावस्था को भी सुरक्षित मातृत्व में बदला जा सकता है।
राजकीय जनाना चिकित्सालय, सादड़ी की टीम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सरकारी अस्पतालों में भी समर्पित चिकित्सक और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी हर दिन अनगिनत परिवारों की उम्मीदों को नया जीवन देने का कार्य कर रहे हैं। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था की सफलता है, बल्कि संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं और मानवीय समर्पण की भी प्रेरणादायक मिसाल बन गई।



