‘नशे को ना, सपनों को हां’… पाली में ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान की शुरुआत, स्कूलों में न्यायिक अधिकारियों ने जगाई कानूनी चेतना

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर की ओर से शुरू किए गए ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे (परिवर्तनकारी मंगलवार)’ अभियान के तहत मंगलवार को पाली जिले के विभिन्न सरकारी एवं निजी विद्यालयों में विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को कानून, उनके अधिकारों और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक कर जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने बताया कि अभियान की शुरुआत “नशे को ना कहो, अपने सपनों को हां कहो – नशा कोई स्टाइल नहीं, अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करो” थीम के साथ की गई। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
अभियान के तहत विशिष्ट न्यायाधीश (एसीडी प्रकरण) अनुप कुमार पाठक ने दिल्ली पब्लिक स्कूल, सचिव विक्रम सिंह भाटी ने मधुरम उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा विशिष्ट न्यायाधीश (एनआई एक्ट) विनस चौधरी ने एम.एस. कवाड़ इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद किया।
कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों ने कहा कि नशा केवल स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि शिक्षा, परिवार और पूरे समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि अधिकांश किशोर जिज्ञासा, गलत संगति, साथियों के दबाव, सोशल मीडिया या तनाव के कारण नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, जबकि एक बार किया गया प्रयोग भी जीवनभर की लत बन सकता है।

विद्यार्थियों को एनडीपीएस अधिनियम, नशीले पदार्थों के दुष्प्रभाव, कानूनी सुरक्षा, परामर्श सेवाओं और सहायता तंत्र की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें खेल, योग, पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़कर सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने स्वयं नशे से दूर रहने और अपने परिवार व समाज को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ ली।
अभियान की विशेष पहल के रूप में न्यायिक अधिकारियों ने विद्यालयों में ‘कोर्ट वाली दीदी’ शिकायत पेटी भी स्थापित करवाई। इसके माध्यम से विद्यार्थी विद्यालय या अपने आसपास की किसी भी समस्या अथवा शिकायत को गोपनीय रूप से लिखकर पेटी में डाल सकेंगे, जिस पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम में विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, अधिकार मित्र मांगीलाल तंवर सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि यदि विद्यार्थियों को बचपन से ही कानून, अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाए तो भविष्य में अपराध और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से यह अभियान अब जिले के अन्य विद्यालयों में भी चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा।



