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पाली में शिक्षक संघ का जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शुरू, विद्यार्थी हित और शिक्षकों की समस्याओं पर हुआ मंथन

पाली : राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ का जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन शुक्रवार को श्रीमती चीमा बाई संचेती राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, पैकेज कॉलोनी पाली में शुरू हुआ। सम्मेलन का शुभारंभ मां सरस्वती की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षक संघ के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया।

सम्मेलन में शिक्षकों की समस्याओं, विद्यार्थी हित, संगठन की भूमिका और शैक्षिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने शैक्षिक सम्मेलनों को शिक्षकों के लिए संवाद और समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण मंच बताया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवाराम प्रजापत ने शिक्षकों से विद्यार्थी हित को प्राथमिकता देते हुए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनकी भूमिका अहम है।

उन्होंने शिक्षक संघ की ओर से रखी जाने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आश्वस्त किया और शिक्षकों से शिक्षा के क्षेत्र में जिम्मेदारी एवं सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने की बात कही।

विशिष्ट अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी दिलीप करमचंदानी ने संगठन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगठन का अर्थ एकजुटता है। संगठन के आह्वान पर सभी शिक्षकों की एकजुटता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सामूहिक शक्ति और आपसी समन्वय के माध्यम से संगठनात्मक गतिविधियों को प्रभावी बनाया जा सकता है।

अतिविशिष्ट अतिथि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी खींवाराम चौधरी ने शिक्षक संघ के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संगठन अपने कार्यों की समीक्षा के लिए शिक्षकों से फीडबैक लेता है और उसके आधार पर आगे की गतिविधियों को दिशा देता है। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए संगठनात्मक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी राहुल कुमार राजपुरोहित ने कहा कि शैक्षिक सम्मेलन को केवल अवकाश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह शिक्षकों की समस्याओं, शैक्षिक व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने शिक्षकों से सम्मेलन में खुलकर अपने विचार रखने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा करने का आह्वान किया।

अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चन्द्रेशपाल सिंह रातड़ी, प्रवीण जांगिड़ एवं उप जिला शिक्षा अधिकारी (शारीरिक शिक्षा) बलवीर सिंह राणावत ने शिक्षक संगठनों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए शिक्षक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। संगठन के माध्यम से शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को व्यवस्थित रूप से सामने रखा जा सकता है।

संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राधेश्याम सोनी ने शिक्षकों की समस्याओं को संगठन के माध्यम से समाधान तक पहुंचाने के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया। उन्होंने संगठन की गतिविधियों और शिक्षकों के हित में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय की समस्याओं को मजबूती से उठाने के साथ विद्यार्थियों के हित में भी लगातार काम किया जाना चाहिए।

संघ के जिलाध्यक्ष संजीव शर्मा ने अपने संबोधन में शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन की ओर से किए गए प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सम्मेलन में पहुंचे अधिकारियों, अतिथियों और शिक्षक साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने संगठन की आगामी गतिविधियों और शिक्षकों से जुड़े विषयों पर भी विचार रखे।

सम्मेलन में प्रदेश महिला मंत्री श्रीमती कृष्णा शर्मा, प्रदेश संयुक्त संगठन मंत्री जब्बर सिंह राठौड़, जिला मंत्री रतन बारूपाल, जिला उपाध्यक्ष पंकज शर्मा, महिला अध्यक्ष संध्या दवे, जिला कोषाध्यक्ष हेमंत दवे सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

इसके अलावा मनोज अग्रवाल, घीसूलाल दवे, संजय निम्बार्क, भगत सिंह, राजेश गौड़, अम्बुज पचौरी, दलपत राज रांकावत, सुरेन्द्र शर्मा, अरविन्द जोशी, हरीश व्यास, घनश्याम चौहान, महेन्द्र आसेरी, विमलेश भदौरिया, नीलिमा अचलावत, जयंता व्यास, कान्ता राजपुरोहित, नीता सोलंकी, नीतू डागा, सोना सिंधी, जयपाल सिंह, यजुवेन्द्र खेमलानी, दिनेश बामणिया, महेश गोयल, अश्विनी जोशी, पंकज जांगिड़, राजू राम कुम्हार, लोकेश पंवार सहित कई शिक्षक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन के माध्यम से शिक्षकों की समस्याओं, संगठन की भूमिका और विद्यार्थी हित से जुड़े मुद्दों पर संवाद का मंच तैयार हुआ। अधिकारियों और संगठन पदाधिकारियों ने शिक्षकों को अपनी समस्याएं उचित मंच पर रखने तथा शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया।

Rajasthan Today

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