‘संस्कृति से संस्कार’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मिला भारतीय मूल्यों का संदेश, रामचरितमानस प्रश्नोत्तरी में दिखा उत्साह

पाली : राजकीय बांगड़ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पाली एवं सांस्कृतिक चेतना मंच के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को ‘संस्कृति से संस्कार’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, संस्कारों और जीवन में उनके महत्व से परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. विनिता कोका ने की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं से जुड़ने के साथ-साथ सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, सदाचार और अनुशासन जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांस्कृतिक चेतना मंच के प्रतिनिधि एवं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार शर्मा ने भारतीय पुराणों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति को उसके वास्तविक स्वरूप में समझने के लिए पुराणों का अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत, जीवन मूल्यों और आदर्शों के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनमें जीवन को बेहतर बनाने वाले अनेक प्रसंग और आदर्श मिलते हैं।
विनोद कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने मर्यादा, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्राचार्य डॉ. विनिता कोका ने भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा के साथ संस्कारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के साथ उनके नैतिक एवं चारित्रिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझकर उसे जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।

कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता नर्सिंग कॉलेज, पाली के प्राचार्य के.सी. सैनी ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है।
उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने और समाज में जागरूक नागरिक की भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी नशामुक्ति को लेकर अपने आसपास के लोगों में भी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शिक्षा विभाग, पाली के संयुक्त निदेशक अजय गुप्ता ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल तकनीक आज शिक्षा और ज्ञान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है, लेकिन इसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से किया जाना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन का उपयोग शिक्षा, अध्ययन, जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही तकनीक के अनावश्यक एवं नकारात्मक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी।
कार्यक्रम में ओमप्रकाश ने भारतीय संस्कारों एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहने तथा उन्हें दैनिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संस्कार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार और जीवनशैली में दिखाई देना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान रामचरितमानस पर आधारित रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संकाय सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रश्नोत्तरी के माध्यम से प्रतिभागियों को रामायण के विभिन्न प्रसंगों, भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार स्वरूप श्री सुंदरकांड की पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया। पुस्तक के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक साहित्य से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन आशा मुंदड़ा ने किया। आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं एवं विभिन्न दायित्वों का निर्वहन महाविद्यालय के सहायक आचार्य गोमाराम ने किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों को लेकर उत्साह दिखाई दिया।
‘संस्कृति से संस्कार’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जुड़ने, जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने, नशे से दूर रहने और मोबाइल सहित आधुनिक तकनीक का सकारात्मक एवं विवेकपूर्ण उपयोग करने का संदेश दिया गया।



