बाली में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कवायद, 56 एएनएम को दिया गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व देखभाल का प्रशिक्षण

पाली : जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से जपाईगो संस्थान की ओर से बाली उपखण्ड मुख्यालय पर गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व सेवाओं को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बाली एवं सुमेरपुर ब्लॉक की 56 एएनएम ने भाग लिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य एएनएम को प्रसव पूर्व देखभाल यानी एएनसी (ANC) सेवाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कौशल और तकनीकी जानकारी प्रदान करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, जोखिम की पहचान, आवश्यक परामर्श और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान समय पर स्वास्थ्य जांच और उचित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के माध्यम से एएनएम को यह जानकारी दी गई कि वे अपने कार्यक्षेत्र में गर्भवती महिलाओं को बेहतर एवं समयबद्ध प्रसव पूर्व सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार करना तथा प्रत्येक गर्भवती महिला तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।
एडिशनल सीएमएचओ डॉ. जीतकुमार गुर्जर ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान जपाईगो संस्थान के प्रतिनिधियों ने प्रसव पूर्व सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी दी।
प्रशिक्षण में एएनएम को गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, आवश्यक जांच समय पर करवाने, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान करने तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों को समय रहते चिन्हित कर आवश्यक कार्रवाई करने के संबंध में जानकारी दी गई।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य कार्यक्रम अधिकारी दंडे सिरीशा, विशाल, संजय पाठक एवं माधव सिंह ने प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी एएनएम की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए प्रसव पूर्व देखभाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं को व्यावहारिक तरीके से समझाया गया।
प्रशिक्षण में एएनएम को गर्भवती महिलाओं के साथ प्रभावी संवाद एवं आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श देने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को समय पर जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. वेदान्त गर्ग ने बताया कि प्रशिक्षण गतिविधियों में नर्सिंग प्रशिक्षक कमल कुमार गहलोत एवं भूपेंद्र कुमार ने भी सहयोग प्रदान किया। तीन दिन तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार को हुआ।
समापन अवसर पर एएनएम को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया।

आरसीएचओ डॉ. विजेंद्रपाल सिंह चुंडावत ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रसव पूर्व सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर आवश्यक जांच एवं परामर्श तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने कहा कि एएनएम स्वास्थ्य विभाग की जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे प्रशिक्षणों के माध्यम से उनके तकनीकी ज्ञान और कार्यकुशलता को मजबूत किया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
प्रशिक्षण के माध्यम से एएनएम को गर्भवती महिलाओं की जरूरतों के अनुसार समय पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने और नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। विभाग का जोर इस बात पर रहा कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी संभावित जोखिम की पहचान समय रहते हो और जरूरत पड़ने पर महिला को उचित स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से मैदानी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता में वृद्धि होगी और इसका सीधा लाभ गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में मिल सकेगा।



