
पाली : अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर महिला अधिकारिता विभाग, पाली एवं राजस्थान सरकार के निर्देशन में आयोजित ‘नारी चौपाल—सशक्त बालिका, सुरक्षित समाज’ सप्ताह के तहत बालिकाओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में 11 अक्टूबर को संस्कार केंद्र स्कूल में माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण एवं सोशल मीडिया प्रबंधन विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बालिकाओं को शिक्षा, सुरक्षा, अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य और डिजिटल माध्यमों के जिम्मेदार उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। कार्यक्रम के दौरान 144 बालिकाओं का माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण करवाया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन, सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यशाला में बालिकाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने भविष्य के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला अधिकारिता विभाग, पाली के उपनिदेशक भागीरथ चौधरी ने की। उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा, समानता, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा करने तथा उन्हें शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध करवाने की शपथ भी दिलाई गई।
इस अवसर पर समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए परिवार एवं समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और शिक्षा के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।
कार्यशाला में पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र की केंद्र प्रबंधक प्रियंका व्यास ने माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने और सोशल मीडिया प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यशाला के दौरान तनाव, परीक्षा के दबाव, पढ़ाई से जुड़ी चुनौतियों और अकेलेपन जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। बालिकाओं को इन परिस्थितियों को समझने, अपनी समस्याओं के प्रति जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने के महत्व के बारे में बताया गया।
माय भारत पोर्टल पर 144 बालिकाओं का पंजीकरण होने से उन्हें युवा गतिविधियों और उपलब्ध अवसरों से जुड़ने की दिशा में प्रोत्साहित किया गया।
पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र की सामाजिक परामर्शदाता उर्मिला ने वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं एवं सुविधाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि महिलाओं और बालिकाओं को आवश्यकता के समय उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी होना जरूरी है, ताकि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उचित सहायता प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्हें अपने आसपास होने वाली समस्याओं के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यशाला के माध्यम से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने बालिकाओं को शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाने, उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए समाज से सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बालिकाओं को सुरक्षित वातावरण, समान अवसर और उचित मार्गदर्शन मिलने से वे आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। शिक्षा और जागरूकता को बालिका सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्य विमला मंत्री, जितेंद्र भारती, सीमा मंत्री, सानिया बागवान सहित विद्यालय की 80 बालिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यशाला के दौरान बालिकाओं ने डिजिटल जागरूकता, शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़े विषयों की जानकारी प्राप्त की।
‘नारी चौपाल—सशक्त बालिका, सुरक्षित समाज’ सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।



