पाली में विजयादशमी पर RSS का शस्त्र पूजन और भव्य पथ संचलन, पुष्पवर्षा से हुआ स्वयंसेवकों का स्वागत

पाली : असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक विजयादशमी पर्व के अवसर पर सोमवार को पाली के सोमनाथ उपनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से उत्सव एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। धरमपुरा स्थित पिंजरापोल गौशाला में दोपहर 3:30 बजे आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रभावना का माहौल देखने को मिला। विधि-विधान से शस्त्र पूजन के बाद संघ का भव्य पथ संचलन निकाला गया, जिसका शहर के विभिन्न मार्गों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया।
जिला संचालक नेमीचंद अखावत ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध भजन गायक हेमराज गोयल ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में संघ के अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख जगदीश प्रसाद उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के स्वागत के बाद शस्त्र पूजन किया गया और इसके बाद बौद्धिक कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को समाज एवं राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता जगदीश प्रसाद ने ‘भारत एक मृत्युंजय राष्ट्र है’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने पौराणिक आख्यानों का उल्लेख करते हुए देवगुरु बृहस्पति के पुत्र कच और असुर गुरु शुक्राचार्य से जुड़ी संजीवनी विद्या की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और समाज में ऐसी आंतरिक शक्ति है, जिसके बल पर देश ने अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है।
उन्होंने कहा कि सदियों के आक्रमणों और संघर्षों के बावजूद भारतीय समाज बार-बार उठ खड़ा हुआ और अपनी सांस्कृतिक चेतना तथा सामर्थ्य को बनाए रखा। उनके अनुसार, समाज की जागरूकता और संगठित शक्ति राष्ट्र को मजबूती प्रदान करती है।
जगदीश प्रसाद ने समाज की एकजुटता का महत्व समझाने के लिए वर्ष 1905 में लॉर्ड कर्जन द्वारा किए गए बंगाल विभाजन के फैसले का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर सहित अनेक लोगों के आह्वान पर देशभर में बंग-भंग के विरोध में आंदोलन हुआ। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1911 में बंगाल विभाजन रद्द कर दिया।
उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से कहा कि जब समाज किसी उद्देश्य के लिए एकजुट होकर खड़ा होता है, तो बड़े से बड़े फैसले को भी चुनौती दी जा सकती है।

मुख्य वक्ता ने वर्तमान समय में चल रहे विभिन्न नकारात्मक विमर्शों का उल्लेख करते हुए 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए भाषण का स्मरण कराया। उन्होंने युवाओं से हिंसक और असंवैधानिक आंदोलनों से दूर रहने तथा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मार्ग अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने विश्वास जताया कि आज की युवा पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति समर्पण और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता है। उन्होंने नचिकेता, छत्रपति शिवाजी महाराज, भगत सिंह और राजगुरु जैसे ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को युवाओं के लिए आदर्श बताया।
शस्त्र पूजन और बौद्धिक कार्यक्रम के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन निकाला गया। पूर्ण गणवेश में शामिल स्वयंसेवक घोष की धुनों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े। संचलन का मार्ग पिंजरापोल गौशाला से शुरू होकर रामदेव रोड, सिंधी कॉलोनी, पानी दरवाजा, भैरूघाट, सोमनाथ मंदिर, सराफा बाजार, गोल निम्बड़ा, जांगीवाड़ा, मंडिया रोड और घरवाला जाव से होकर गुजरा। इसके बाद संचलन पुनः पिंजरापोल गौशाला पहुंचा, जहां इसका विधिवत समापन हुआ।

पथ संचलन के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों से संचलन मार्ग का वातावरण गुंजायमान रहा। कार्यक्रम और पथ संचलन में सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक एवं समाजबंधु शामिल हुए।
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में शस्त्र पूजन, बौद्धिक उद्बोधन और पथ संचलन के माध्यम से अनुशासन, सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रभावना का संदेश दिया गया।



