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पाली में रावणा राजपूत समाज ने किया शस्त्र पूजन, ‘शक्ति का उपयोग रक्षा और न्याय के लिए हो’ का दिया संदेश

पाली : विजयादशमी के पावन पर्व पर रावणा राजपूत समाज की ओर से मंगलवार को सर्वोदय नगर स्थित मुख्य समाज भवन में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने शस्त्रों की साफ-सफाई कर उन पर पुष्प अर्पित किए तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर समाज की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और खुशहाली की कामना की गई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने शस्त्र पूजन की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि साहस, स्वाभिमान, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को स्मरण करने का अवसर भी है।

समाज के मीडिया प्रभारी विक्रम सिंह परिहार ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान शस्त्र पूजन की परंपरा और उसके महत्व पर विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने कहा कि यह परंपरा अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, अपनी संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करने तथा समाज में जिम्मेदारी के साथ शक्ति का उपयोग करने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व सत्य की असत्य पर विजय और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर शस्त्र पूजन के माध्यम से समाज के लोग साहस, अनुशासन और आत्मरक्षा के संकल्प को दोहराते हैं।

मुख्य संरक्षक मूल सिंह भाटी ने कहा कि शस्त्र पूजन की परंपरा व्यक्ति को साहस, आत्मरक्षा और कर्तव्यनिष्ठा का बोध कराती है। शस्त्रों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ प्रत्येक व्यक्ति को यह संकल्प भी लेना चाहिए कि वह अपनी शक्ति का उपयोग सदाचार, आत्मरक्षा और दूसरों की सुरक्षा के लिए करेगा।

उन्होंने कहा कि शक्ति का उपयोग अहंकार या अत्याचार के लिए नहीं, बल्कि उचित उद्देश्य और समाजहित के लिए होना चाहिए। शस्त्र पूजन का वास्तविक संदेश जिम्मेदारी, संयम और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता है।

जिलाध्यक्ष प्रमेन्द्र सिंह परिहार ने कहा कि दशहरे पर शस्त्र पूजन केवल विजय का उत्सव नहीं है, बल्कि अपनी शक्ति और उससे जुड़ी जिम्मेदारी को समझने का अवसर भी है। शस्त्र अपने आप में अच्छे या बुरे नहीं होते, बल्कि उनका महत्व इस बात से तय होता है कि उनका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार के लिए शक्ति का इस्तेमाल करना अनुचित है। वहीं निर्दोषों की रक्षा, सुरक्षा और न्याय की स्थापना के लिए शक्ति का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने समाजजनों से परंपराओं के संरक्षण के साथ नैतिक मूल्यों और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

शस्त्र पूजन कार्यक्रम में भंवर सिंह राठौड़, दलपत सिंह, ओम सिंह सोढ़ा, हेमंत सिंह भाटी, महिपाल सिंह भाटी, विजय सिंह भाटी, रविंद्र सिंह सोलंकी, जयपाल सिंह चौहान, लक्ष्मण सिंह चौहान, अर्जुन सिंह चौहान, जितेंद्र सिंह इंदा, गोविंद सिंह सिसोदिया, बाबू सिंह परिहार, मांगू सिंह गोयल, सुमेर सिंह चावड़ा, केसर सिंह मांगलिया, तेज सिंह चौहान, शैतान सिंह राठौड़, पूनम सिंह राठौड़, राजू सिंह चौहान और भंवर सिंह परिहार सहित समाज की विभिन्न शहर इकाइयों के अध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्य एवं समाजबंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विजयादशमी की परंपरा के अनुरूप शस्त्र पूजन कर समाज की एकता, सुरक्षा, सद्भाव और खुशहाली की कामना की गई।

Rajasthan Today

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