पुनर्वास गृह और जिला कारागृह का औचक निरीक्षण, बच्चों की सुविधाओं से लेकर बंदियों के अधिकारों तक की ली जानकारी

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पाली की ओर से जरूरतमंदों और बंदियों को उपलब्ध सुविधाओं एवं विधिक अधिकारों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने ऋद्धि-सिद्धि सेवा संस्थान द्वारा संचालित मानसिक विमंदित पुनर्वास गृह, रामासिया तथा जिला कारागृह पाली का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का अवलोकन कर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आवश्यक जानकारी ली और सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सचिव भाटी ने पुनर्वास गृह में बच्चों को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने भोजन, पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा व्यवस्था, पुनर्वास प्रक्रिया तथा संस्थान में रखे जाने वाले अभिलेखों के संधारण की स्थिति का अवलोकन किया।
संस्थान के कर्मचारियों ने बताया कि पुनर्वास गृह में बच्चों के लिए आवास, भोजन, शिक्षण और योग की निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। साथ ही बच्चों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार भी दिया जाता है।
सचिव भाटी ने बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया को समझते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे को उपलब्ध सुविधाओं का लाभ सुगमता से मिलना चाहिए। बच्चों की समय-समय पर चिकित्सकीय जांच करवाई जाए तथा उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाए। उन्होंने मौसम के अनुकूल आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने पर भी जोर दिया, ताकि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिल सके।

पुनर्वास गृह के निरीक्षण के बाद सचिव विक्रम सिंह भाटी ने जिला कारागृह पाली का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कारागृह में कुल 96 बंदी निरुद्ध पाए गए। उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर वहां उपलब्ध भोजन, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने कारागृह प्रशासन से व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी लेते हुए बंदियों की समस्याएं भी सुनीं। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कारागृह में निरुद्ध व्यक्तियों को आवश्यक सुविधाएं और उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी मिल रही है या नहीं।
सचिव भाटी ने बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक या अन्य कारणों से निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ बंदी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बंदियों को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और जरूरत पड़ने पर विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क करने की जानकारी दी।
इस दौरान उन्होंने ऐसे बंदियों के प्रकरणों की स्थिति की भी जानकारी ली, जिनकी जमानत स्वीकृत होने के बावजूद वे अभी तक कारागृह में निरुद्ध हैं। उन्होंने संबंधित बंदियों को उनके प्रकरणों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और उनकी समस्याओं को सुना।

निरीक्षण के दौरान सचिव भाटी ने नवागंतुक बंदियों से बातचीत कर कथित घटना अथवा आरोपित अपराध के समय उनकी आयु के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही कारागृह में बंदियों को उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का भी जायजा लिया गया।
कारागृह प्रशासन की ओर से बताया गया कि सभी बंदियों की ओपीडी के समय स्वास्थ्य जांच की जाती है। वहीं किसी भी आपातकालीन स्थिति में बंदियों को उपचार के लिए राजकीय बांगड़ अस्पताल, पाली रेफर किया जाता है। निरीक्षण के अवसर पर जिला कारागृह पाली के कारापाल जोराराम, उपकारापाल नरेश सहित अन्य कार्मिक उपस्थित रहे।



