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पाली : इस्कॉन पाली में श्रील प्रभुपाद जी का जन्मोत्सव भक्तिभाव से मनाया गया

पाली : जगत के पालनहार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अगले दिन नन्दोत्सव के अवसर पर इस्कॉन (अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ) के संस्थापक आचार्य श्री श्रीमद् ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी का जन्मोत्सव इस्कॉन पाली में श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 4 बजे हरे कृष्ण महामंत्र के जप से हुई। भक्तों ने दो घंटे तक सामूहिक नामस्मरण किया। इसके बाद 6:30 बजे मंगल आरती, नृसिंह आरती, तुलसी आरती और गुरु पूजा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर प्रभुपाद जी का विशेष फूलों से श्रृंगार किया गया।

कार्तिक कृष्ण प्रभुजी ने बताया कि श्रील प्रभुपाद जी का जन्म 1 सितंबर 1896 को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में हुआ था। उन्हें विश्वभर में हरे कृष्ण आंदोलन के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है।
70 वर्ष की आयु में मात्र 40 रुपये लेकर जहाज से अमेरिका पहुँचे और वहीं से उन्होंने हरे कृष्ण महामंत्र का विश्वव्यापी प्रचार शुरू किया। उन्होंने श्रीमद्भागवतम्, भगवद्गीता और चैतन्य चरितामृत सहित 70 से अधिक ग्रंथों का अनुवाद और प्रकाशन कर वैदिक ज्ञान को घर-घर पहुँचाया।

प्रभुपाद जी के मार्गदर्शन से आज हरे कृष्ण महामंत्र संकीर्तन और जगन्नाथ रथयात्रा विश्व के अनेक देशों में होती है। उन्होंने इस्कॉन को एक ऐसा वैश्विक परिवार बताया, “जिसमें पूरा विश्व रह सकता है।”

सायं 4 बजे से हुए विशेष कार्यक्रम में भक्तों ने प्रभुपाद जी की जीवनी पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी, जिसमें उनके संघर्ष, भक्ति और कृष्ण प्रेम को दर्शाया गया। इसके बाद हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन और गुरु पूजा व गौर पूजा का आयोजन हुआ।

भक्तों ने कीर्तन व गुणगान कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया और प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रभुपाद जी की जीवन शैली और उनके उपदेश आज भी समाज को कृष्ण भक्ति के मार्ग पर अग्रसर कर रहे हैं।

Rajasthan Today

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