विश्व पर्यावरण दिवस पर सिणगारी में जागा पर्यावरण चेतना का संकल्प, जल संरक्षण और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन का आह्वान

पाली : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रोहट क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिणगारी में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रामीण विकास विज्ञान समिति (ग्राविस) द्वारा यूरोपीय यूनियन के सहयोग से संचालित एसएबीएल (SABL) परियोजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों, जल संरक्षण की आवश्यकता, वृक्षारोपण और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुका है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्राम सेवक किशोर कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिमी राजस्थान के क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। लगातार बदलते मौसम, घटती वर्षा और बढ़ती जल समस्या ग्रामीण जीवन एवं कृषि व्यवस्था के लिए चुनौती बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को पुनर्जीवित करना समय की मांग है। वर्षा जल संग्रहण, जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
ग्राम अधिकारी हरी नारायण शर्मा ने ग्रामीणों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा गांवों को स्वच्छ रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित होकर प्रयास करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
समाजसेवी भूराराम ने ग्राविस द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे वर्षा जल संग्रहण एवं संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने किसानों को जैविक खेती, बीज संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा कृषि में जल प्रबंधन की आधुनिक एवं पारंपरिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ही कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
ग्राविस के प्रतिनिधि शायबाज़ खान ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति बचाने का अभियान नहीं है, बल्कि यह गांवों के सतत विकास और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार भी है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के बजाय सामूहिक जनआंदोलन का स्वरूप दें, ताकि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी सामना किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान परियोजना की क्षेत्रीय पर्यवेक्षक हेमलता भाटी ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी से वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
क्षेत्रीय पर्यवेक्षक राजू सिंह ने बताया कि एसएबीएल परियोजना के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को कृषि आधारित आजीविका के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और उनसे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्थानीय संसाधनों का संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना आवश्यक है।
कार्यक्रम में सोमा, उगलीबाई, गीता, मंगली, संगीता, कुलगीत कौर सहित विभिन्न गांवों से आए करीब 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, वृक्ष लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।



