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पाली के उद्योगों पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल सख्त, नियम तोड़ने पर स्थायी बंदी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

पाली : पाली के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और पर्यावरणीय मानकों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरपीसीबी) ने बड़ा कदम उठाया है। मंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ स्थायी बंदी से लेकर न्यायालयीन कार्रवाई तक की जाएगी।

सोमवार शाम मंडिया रोड स्थित एसोसिएशन भवन में आयोजित बैठक में क्षेत्रीय अधिकारी राहुल शर्मा ने औद्योगिक इकाइयों के संचालकों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए। बैठक में प्रदूषित पानी के निस्तारण, उद्योग संचालन, टैंकर व्यवस्था और मशीनों के उपयोग को लेकर सख्त नियम तय किए गए।

बैठक में निर्णय लिया गया कि कपड़ा सहित अन्य औद्योगिक इकाइयां अब सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्धारित रोस्टर के अनुसार ही संचालित होंगी। उद्योगों के संचालन का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि अपशिष्ट जल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सके।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने औद्योगिक क्षेत्रों में बिना पंजीकरण वाले टैंकरों के प्रवेश और संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। मीठे पानी की आपूर्ति करने वाले सभी टैंकरों पर “फ्रेश वाटर टैंकर” स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा उद्योगों को अपने निजी जल स्रोतों, जैसे बोरवेल और ट्यूबवेल की जानकारी भी बोर्ड कार्यालय में उपलब्ध करानी होगी।

बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ औद्योगिक इकाइयों में हॉट स्टेंटर मशीनों का उपयोग रंगाई कार्य के लिए किया जा रहा है। क्षेत्रीय अधिकारी राहुल शर्मा ने इसे पर्यावरणीय मानकों के खिलाफ बताते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गतिविधियां पूर्णतः प्रतिबंधित हैं। नियमों की अवहेलना करने वाले उद्योगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

आरपीसीबी ने साफ कर दिया कि यदि कोई औद्योगिक इकाई प्रदूषित पानी छोड़ते हुए पाई जाती है तो उसके खिलाफ स्थायी बंदी की कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों को उच्च अधिकारियों के माध्यम से न्यायालय तक भी पहुंचाया जा सकता है।

औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल की निगरानी के लिए स्थापित स्काडा प्रणाली (SCADA System) का नियंत्रण प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पास रहेगा। साथ ही औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी डिस्चार्ज होने वाले अपशिष्ट जल की नियमित निगरानी करेंगे।

बैठक में निर्देश दिए गए कि रीको क्षेत्र के स्टॉर्म वाटर ड्रेनों का उपयोग किसी भी स्थिति में प्रदूषित पानी या सीवरेज के निस्तारण के लिए नहीं किया जाएगा। मानसून को देखते हुए इन ड्रेनों की नियमित सफाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने मुख्य द्वार पर स्थायी सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बोर्ड पर इकाई का नाम, पता, जोन, रोटेशनल बंदी का दिन तथा सीटीओ (कंसेंट टू ऑपरेट) की वैधता अवधि अंकित करना अनिवार्य होगा।

बैठक के अंत में क्षेत्रीय अधिकारी राहुल शर्मा ने सभी उद्यमियों से पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि नियमों की अनदेखी करने वाले उद्योगों के खिलाफ अब किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

Rajasthan Today

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