
पाली : दहेज जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने और युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से राजकीय बांगड़ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पाली में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में ‘दहेज मुक्त समाज’ संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और महाविद्यालय के कार्मिकों ने दहेज न लेने और न देने का संकल्प लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. विनिता कोका ने की। उन्होंने उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं कार्मिकों को दहेज प्रथा का बहिष्कार करने की शपथ दिलाते हुए कहा कि दहेज केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, समानता और अधिकारों पर गंभीर आघात है। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा आर्थिक शोषण, पारिवारिक तनाव और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसी कई सामाजिक समस्याओं की प्रमुख वजह बनती जा रही है।

प्राचार्य डॉ. कोका ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल स्वयं दहेज न लेने-न देने का संकल्प ही न लें, बल्कि अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जब युवा बदलाव का संकल्प लेते हैं, तभी समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. संगीता आर्या ने दहेज प्रथा के सामाजिक, आर्थिक और मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कुरीति का उन्मूलन केवल कानून से नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और युवाओं की सकारात्मक सोच से ही संभव है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी यदि दहेज का विरोध करेगी तो आने वाले समय में समाज इस बुराई से मुक्त हो सकेगा।

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं सहायक आचार्य गोमाराम तथा सुश्री मंजू देवासी ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए समाज में दहेज विरोधी जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा अपने जीवन में दहेज न लेने और न देने का संकल्प निभाए तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं एवं महाविद्यालय परिवार ने दहेज मुक्त समाज के निर्माण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने तथा सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया। महाविद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक चेतना और युवा सहभागिता का प्रभावी संदेश बनकर सामने आया।



