google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

कुपोषित बच्चों की सेहत पर प्रशासन की नजर, 401 कुपोषित और 218 अतिकुपोषित बच्चों की होगी मेडिकल जांच

पाली : जिले में कुपोषण की स्थिति में सुधार, बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और महिला-बालिका कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। शुक्रवार को जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी की अध्यक्षता में जिला पोषण अभिसरण योजना समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिले में चिन्हित कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, दस्तावेजों की उपलब्धता, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति तथा पोषण संबंधी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में जिले में चिन्हित 401 कुपोषित एवं 218 अतिकुपोषित बच्चों का नियमानुसार चिकित्सकीय परीक्षण करवाने के निर्देश दिए गए। जिला कलक्टर ने बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर 11 सितंबर 2026 तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिन्हित बच्चे की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति की नियमित निगरानी हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाए।

जिला कलक्टर ने अधिकारियों से कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के बैंक खाते, बैंक डायरी, आधार कार्ड और जन आधार कार्ड की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन लाभार्थियों के आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं अथवा जो पात्र होने के बावजूद योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं, उनकी पृथक सूची तैयार की जाए, ताकि उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा सके।

चिकित्सकीय जटिलता वाले बच्चों को नियमानुसार एमसीसी सेंटर रेफर करने तथा अन्य बच्चों की आंगनबाड़ी स्तर पर नियमित स्वास्थ्य जांच एवं पोषण संबंधी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय-समय पर गृह भ्रमण (होम विजिट) करने और बच्चों की स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी चिन्हित लाभार्थियों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया, ताकि कुपोषण की स्थिति में सुधार के साथ बच्चों को समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की भी समीक्षा की गई। जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि जहां संभव हो, ऐसे केंद्रों को निकटतम राजकीय विद्यालय के भवन में संचालित करने की कार्यवाही की जाए। इसके लिए प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से निकटतम विद्यालय की दूरी सहित सूची तैयार कर 11 सितंबर तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों के संबंध में उन्होंने कहा कि जहां भूमि उपलब्ध है, वहां नवीन भवन निर्माण के लिए भामाशाहों एवं जनसहयोग से प्रयास किए जाएं। संभावित भामाशाहों से संपर्क कर आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला कलक्टर की अनुमति के बिना किसी भी आंगनबाड़ी केंद्र को विद्यालय से बाहर अथवा अन्य स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। स्थानांतरण की प्रक्रिया सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त करने के बाद ही की जाएगी।

जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी की अध्यक्षता में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जिला टास्क फोर्स की बैठक भी आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न एजेंडा बिंदुओं की समीक्षा करते हुए आगामी त्रैमास में संचालित किए जाने वाले कार्यक्रमों को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

समिति सचिव एवं महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक भागीरथ ने पिछले त्रैमास में किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की तथा आगामी त्रैमास के लिए जिला एक्शन प्लान रखा।

बैठक में हरियालो राजस्थान, प्रतिभावान बालिकाओं का जिला स्तरीय सम्मान, कॉफी विद कलक्टर, बाल विवाह मुक्त राजस्थान अभियान, किशोरी बालिकाओं के एक्सपोजर विजिट और अमृता हाट सहित विभिन्न कार्यक्रमों पर चर्चा की गई।

जिला कलक्टर ने सखी वन स्टॉप सेंटर के संचालन की भी जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्धारित कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।

बैठक में महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक भागीरथ ने जानकारी दी कि कलक्टर परिसर में नवीन स्थापित शिशु वात्सल्य गृह की स्थापना प्रारंभ कर दी गई है।

इसके साथ ही जिला महिला समाधान समिति की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में जिला कलक्टर ने कार्यस्थलों पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 के प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने जिले के सभी राजकीय एवं गैर-राजकीय कार्यालयों में आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) के पुनर्गठन के निर्देश दिए, ताकि कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

बैठक में अधिकारियों एवं समिति सदस्यों से महिला सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई और अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठकों में उपनिदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला अधिकारिता विभाग, आयुर्वेद विभाग, चिकित्सा विभाग, कृषि विभाग, एमसीसी सेंटर, समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। जिला महिला समाधान समिति की बैठक में सीआई पुलिस अनिता रानी, चिकित्सा विभाग से महेश कुमार, उपनिदेशक सामाजिक अधिकारिता विभाग जेपी अरोड़ा, जिला रोजगार अधिकारी मनीष थोरी, उपनिदेशक आईसीडीएस प्रकाश चंद्र, डीएलसी लेबर आसकरण मालवीय, सखी वन स्टॉप सेंटर प्रबंधक देवी बामणिया, केंद्र प्रबंधक प्रियंका व्यास तथा डीएचईडब्ल्यू जेंडर स्पेशलिस्ट राजश्री सहित संबंधित अधिकारी एवं समिति सदस्य उपस्थित रहे।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button