पाली जेल में अचानक पहुंची विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम, 101 बंदियों से सीधे संवाद कर जानी समस्याएं

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पाली के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रमसिंह भाटी ने बुधवार को जिला कारागृह पाली का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जेल में कुल 101 बंदी निरुद्ध मिले। सचिव ने बंदियों से सीधे संवाद कर कारागृह में उपलब्ध सुविधाओं, स्वास्थ्य व्यवस्था और उनकी व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
आकस्मिक निरीक्षण के दौरान बंदियों से बातचीत करते हुए भोजन और पेयजल की व्यवस्था, साफ-सफाई तथा चिकित्सीय सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया गया। साथ ही यह भी जानकारी जुटाई गई कि किसी बंदी को विधिक सहायता प्राप्त करने में परेशानी तो नहीं हो रही है।
सचिव विक्रमसिंह भाटी ने कारागृह में निरुद्ध बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने बंदियों से जेल में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के बारे में भी पूछा।
निरीक्षण के दौरान भोजन-पेयजल व्यवस्था, सफाई व्यवस्था तथा चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। अधिकारियों से जेल में निरुद्ध बंदियों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की गई।

निरीक्षण के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने उन बंदियों के संबंध में भी जानकारी ली, जो आर्थिक अथवा अन्य कारणों से निजी अधिवक्ता करने में सक्षम नहीं हैं और विधिक सहायता के अभाव में अपने प्रकरण की पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसे बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि पात्र बंदी अपने प्रकरण में कानूनी सहायता के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण की सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
इस दौरान बंदियों को उनके प्रकरणों की स्थिति के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराई गई, ताकि उन्हें अपने मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी रहे।
सचिव भाटी ने ऐसे बंदियों के संबंध में भी जानकारी ली, जिनके मामलों में जमानत हो चुकी है, लेकिन किसी कारण से वे अभी भी कारागृह में निरुद्ध हैं। इस संबंध में आवश्यक जानकारी जुटाई गई और बंदियों को उनके प्रकरणों की स्थिति से अवगत कराया गया।
विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से इस तरह की जानकारी लेने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी पात्र व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया या जानकारी के अभाव में अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने विशेष रूप से नवआगंतुक बंदियों से भी बातचीत की। उनसे कथित अपराध की घटना के समय उनकी आयु के संबंध में जानकारी ली गई।
इस दौरान वक्त-ए-घटना बंदी की उम्र से संबंधित जानकारी को भी दर्ज करने और संबंधित प्रकरण में उसके महत्व को ध्यान में रखने के संबंध में बातचीत की गई।

कारागृह प्रशासन की ओर से बताया गया कि सभी बंदियों की ओपीडी के समय स्वास्थ्य जांच की जाती है। किसी बंदी की तबीयत गंभीर होने अथवा आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उसे उपचार के लिए राजकीय बांगड़ अस्पताल, पाली रेफर किया जाता है। सचिव भाटी ने बंदियों से चिकित्सा सुविधा को लेकर भी जानकारी ली और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के बारे में फीडबैक प्राप्त किया।
आकस्मिक निरीक्षण के दौरान विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में जागरूक किया गया। विशेष रूप से ऐसे बंदियों की पहचान और जानकारी लेने पर जोर रहा, जिन्हें आर्थिक स्थिति के कारण निजी अधिवक्ता उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
इस तरह के निरीक्षणों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि जेल में निरुद्ध बंदियों को मूलभूत सुविधाओं के साथ आवश्यक कानूनी सहायता और अपने प्रकरण की जानकारी भी मिलती रहे।
निरीक्षण के दौरान जिला कारागृह के कारापाल जोराराम, उपकारापाल नरेश, जेल विजिटिंग लॉयर अल्ताफ हुसैन सहित कारागृह से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



