कम बारिश से रोहट में फसलें चौपट, खेतों में खड़ी फसल सूखी, किसान नेता बोले- जल्द कराएं गिरदावरी

पाली : जिले के कम बारिश वाले रोहट क्षेत्र में फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा अब जोर पकड़ने लगा है। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन एवं भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिला अध्यक्ष मदन सिंह जागरवाल ने रोहट पंचायत समिति के खाड़ी क्षेत्र में स्थित विश्नोईयों की ढाणियों का दौरा कर खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने किसानों से बातचीत कर फसल खराबे और खेती में आ रही परेशानियों की जानकारी ली।
जागरवाल ने खेतों की स्थिति देखने के बाद कहा कि कम बारिश के कारण क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। उनके अनुसार कई खेतों में फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, जबकि कुछ जगह बची हुई ज्वार की फसल को खेत से निकालने में भी किसानों को अतिरिक्त मजदूरी खर्च करनी पड़ रही है।
जागरवाल ने कहा कि बारिश के अभाव में किसानों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि कई खेतों में फसल इतनी खराब हो चुकी है कि किसान को उससे अपेक्षित उत्पादन मिलने की स्थिति नहीं है।
उन्होंने बताया कि जो थोड़ी बहुत ज्वार की फसल बची है, उसे खेत से निकालने के लिए किसानों को करीब 500 से 600 रुपए तक मजदूरी देनी पड़ रही है। ऐसे में किसान को फसल से लाभ मिलने के बजाय उल्टा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उसके ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
किसान नेता ने पाली जिला कलेक्टर से मांग की कि रोहट क्षेत्र के प्रभावित गांवों में राजस्व विभाग और पटवारियों के माध्यम से जल्द गिरदावरी कराई जाए। उन्होंने कहा कि गिरदावरी के दौरान खेतों में हुए वास्तविक नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जानी चाहिए।
राजस्थान सरकार की ई-गिरदावरी व्यवस्था में भी फसल क्षति के आकलन को दर्ज करने और पारदर्शिता के लिए फसल एवं खसरा संबंधी जानकारी के उपयोग का प्रावधान है।
मदन सिंह जागरवाल ने कहा कि किसानों के खेतों की गिरदावरी गांव की चौपाल में पारदर्शी तरीके से कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक नुकसान सामने आ सके। उनका कहना है कि सही आकलन होने पर पात्र किसानों को सरकारी अनुदान, मुआवजा और फसल बीमा क्लेम का लाभ मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए गिरदावरी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
जागरवाल ने पाली जिले में कम बारिश से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार से अकाल घोषित करने की सिफारिश करने की मांग भी जिला प्रशासन से की। इसके साथ ही उन्होंने पात्र किसानों को इस वर्ष की ₹17 हजार अनुदान राशि जल्द उपलब्ध कराने की मांग रखी।
उन्होंने पिछले वर्ष अनुदान से वंचित रह गए किसानों को भी भुगतान दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन को गिरदावरी और सहायता संबंधी प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।
किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर जागरवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ई-मेल भेजकर किसानों के कर्ज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि किसानों के कर्ज को लेकर केंद्र सरकार ठोस कदम उठाए।
जागरवाल ने कहा कि बड़े ऋण खातों को लेकर समय-समय पर सामने आने वाली कर्जमाफी या राहत की खबरों के बीच किसानों के कर्ज के मुद्दे पर भी प्रभावी नीति की जरूरत है। उन्होंने किसानों से किए गए पूर्व के कर्जमाफी संबंधी वादे को पूरा करने की मांग भी रखी।
जागरवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पाली जिला कलेक्टर से रोहट क्षेत्र के किसानों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों के लिए गिरदावरी, अनुदान, मुआवजा और फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो रोहट क्षेत्र के किसान जिला मुख्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
कम बारिश से फसल खराबे की शिकायतों के बीच अब किसानों की नजर प्रशासन की ओर है। प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक फसल नुकसान का आकलन, गिरदावरी और उसके आधार पर मिलने वाली संभावित राहत आने वाले दिनों में इस मुद्दे की दिशा तय करेगी। राज्य की आधिकारिक कृषि सलाह में भी पाली जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए सूखा परिस्थितियों में वैकल्पिक कृषि उपायों का उल्लेख किया गया है।



