पाली में बीएमडी जांच ने बढ़ाई चिंता, 90% लोग हड्डियों के क्षरण की शुरुआती अवस्था में, 10% में ऑस्टियोपोरोसिस

पाली : बदलती जीवनशैली, धूप से दूरी, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान में लापरवाही का असर अब हड्डियों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। श्रीपरमहंस अथर्व आयुर्धाम में आयोजित बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों ने शहरवासियों में हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
जांच में शामिल लोगों की हड्डियों के घनत्व का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार 90 प्रतिशत लोग ओस्टियोपेनिया, यानी हड्डियों के क्षरण की शुरुआती अवस्था में पाए गए, जबकि 10 प्रतिशत लोगों में ओस्टियोपोरोसिस की स्थिति दर्ज हुई। जांच में शामिल किसी भी व्यक्ति का टी-स्कोर सामान्य श्रेणी में नहीं पाया गया।
बीएमडी जांच में टी-स्कोर के माध्यम से हड्डियों के घनत्व का आकलन किया जाता है। उपलब्ध मेडिकल मानकों के अनुसार सामान्य स्थिति में टी-स्कोर -1.0 से ऊपर माना जाता है। वहीं -1.0 से -2.5 के बीच का स्कोर ओस्टियोपेनिया तथा -2.5 से नीचे का स्कोर ओस्टियोपोरोसिस की श्रेणी में आता है।
जांच के दौरान करीब 10 प्रतिशत लोगों का टी-स्कोर -2.0 या उससे कम दर्ज हुआ। ऐसे मामलों में हड्डियों के कमजोर होने के कारण मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ सकता है।
जांच के आंकड़ों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हड्डियों के कमजोर होने की स्थिति अधिक दर्ज की गई। जांच में शामिल महिलाओं में 88 प्रतिशत ओस्टियोपेनिया और 12 प्रतिशत ओस्टियोपोरोसिस की श्रेणी में पाई गईं।
वहीं पुरुषों में 91.4 प्रतिशत ओस्टियोपेनिया और 8.6 प्रतिशत ओस्टियोपोरोसिस की स्थिति दर्ज हुई। आंकड़े बताते हैं कि दोनों वर्गों में हड्डियों के घनत्व को लेकर सतर्कता की जरूरत है, जबकि महिलाओं में विशेष रूप से हड्डियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता सामने आई।

उम्र के आधार पर जांच के आंकड़ों में भी हड्डियों के कमजोर होने की स्थिति सामने आई। 50 वर्ष से अधिक उम्र के 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग गंभीर ओस्टियोपेनिया और ओस्टियोपोरोसिस की स्थिति में पाए गए।
वहीं 55 से 75 वर्ष आयु वर्ग में -2.0 से कम टी-स्कोर वाले अधिकांश लोग शामिल रहे। इसके अलावा 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग में करीब 95 प्रतिशत लोग ओस्टियोपेनिया की श्रेणी में पाए गए।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि हड्डियों से जुड़ी समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं दिखाई दी। 25 से 39 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी हड्डियों का घनत्व सामान्य स्थिति में नहीं पाया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक घर या दफ्तर में रहना, पर्याप्त धूप नहीं लेना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और असंतुलित खानपान जैसे कारक हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
श्रीपरमहंस अथर्व आयुर्धाम के चिकित्सक डॉ. अखिल व्यास ने बताया कि हड्डियों का घनत्व कम होना ऐसी स्थिति है जिसके शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते। कई बार व्यक्ति को तब पता चलता है जब हड्डियां काफी कमजोर हो चुकी होती हैं और मामूली गिरने या चोट लगने पर फ्रैक्चर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल कैल्शियम लेना पर्याप्त नहीं है। शरीर में विटामिन-डी का पर्याप्त स्तर होना भी जरूरी है, क्योंकि यह कैल्शियम के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. व्यास ने सलाह दी कि शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन-डी उपलब्ध कराने के लिए रोजाना सुबह 20 से 30 मिनट तक गुनगुनी धूप लेने की आदत विकसित करनी चाहिए। इसके साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। उन्होंने रोजाना कम से कम आधा घंटा पैदल चलने या हल्का व्यायाम करने की सलाह दी, ताकि हड्डियों की मजबूती और शरीर की सक्रियता बनी रहे।
डॉ. व्यास ने हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने पर जोर दिया। उन्होंने भोजन में दूध, दही, तिल, हरी सब्जियां और पारंपरिक पौष्टिक आहार शामिल करने की सलाह दी।
साथ ही उन्होंने अत्यधिक चाय-कॉफी, जंक फूड और धूम्रपान से दूरी बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हड्डियों से जुड़ी किसी भी समस्या में बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए।
डॉ. व्यास ने विशेष रूप से 40 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहने की सलाह दी। उन्होंने रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिलाओं और बुजुर्गों को कमर या जोड़ों में लगातार दर्द रहने पर चिकित्सकीय सलाह लेने तथा आवश्यकता के अनुसार बीएमडी जांच करवाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि समय रहते हड्डियों के घनत्व की स्थिति का पता चलने से चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आगे की देखभाल और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
बीएमडी जांच कार्यक्रम के दौरान सॉल्यूमिक्स कंपनी के रूपेश सिसोदिया, धीरेन्द्र सोनी, मनीष, अमित कुशवाह और रिया कंवर भी मौजूद रहे। शिविर में हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर जांच एवं जागरूकता से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं।
बीएमडी जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर केवल उम्रदराज लोगों को ही नहीं, बल्कि युवाओं को भी जागरूक रहने की जरूरत है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान, पर्याप्त धूप और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच हड्डियों की स्थिति पर नजर रखने में मददगार हो सकती है।



