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युवाचार्य महेंद्र ऋषि की जन्म जयंती पर पाली में गूंजा गुणगान, संतों ने की आचार्य पद की मंगलकामना

पाली : श्री रघुनाथ स्मृति जैन भवन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत सोमवार को युवाचार्य महेंद्र ऋषि की जन्म जयंती श्रद्धा और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाई गई। इस अवसर पर धर्मसभा में उपस्थित संतों ने युवाचार्य महेंद्र ऋषि के जीवन, तप, त्याग, स्वाध्याय और गुरुसेवा का गुणगान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

धर्मसभा में संतों ने कामना की कि युवाचार्य महेंद्र ऋषि आगे चलकर आचार्य पद पर आसीन होकर जिन शासन की प्रभावी सेवा करें। जन्म जयंती के अवसर पर पाली संघ की ओर से विशेष अनुमोदना एवं वंदन किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक एकासना कर धार्मिक भावना के साथ जन्म जयंती में सहभागिता की।

गुरुदेव सुकन मुनि ने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल धर्म की बातें सुनना नहीं, बल्कि प्रभु की वाणी के कम से कम एक अंश को अपने जीवन में उतारना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जीवन में कितने भी उतार-चढ़ाव आएं, यदि व्यक्ति मजबूती और धैर्य के साथ आगे बढ़े तो कठिन से कठिन कार्य भी पूरे किए जा सकते हैं। धर्म और गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।

सुकन मुनि ने युवाचार्य महेंद्र ऋषि के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका जन्म अहमदनगर के एक छोटे से गांव में हुआ था। वे बचपन से ही आचार्य आनंद ऋषि महाराज के संपर्क में रहे और उनके प्रति गहरी श्रद्धा रखते थे। उनका स्वभाव सरल, सद्भावपूर्ण और सेवा भावना से परिपूर्ण था।

सुकन मुनि ने बताया कि युवाचार्य महेंद्र ऋषि के मन में धीरे-धीरे संयम जीवन के प्रति भावना जागृत हुई। गुरु के सान्निध्य में रहते हुए उन्होंने धर्मग्रंथों का अध्ययन किया और तप, स्वाध्याय तथा साधना के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते गए।

गुरु के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण को देखते हुए उन्हें आगे चलकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। संतों ने कहा कि गुरु की कृपा, साधना और पुरुषार्थ के कारण महेंद्र ऋषि ने संयम जीवन में निरंतर प्रगति की और युवाचार्य पद तक पहुंचे।

सुकन मुनि ने कहा कि आज उनकी जन्म जयंती पर पाली संघ की ओर से अनुमोदना की जा रही है। उन्होंने लंबे समय तक जिन शासन की सेवा की है और आचार्य श्री की उन पर विशेष कृपा रही है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं की ओर से युवाचार्य महेंद्र ऋषि के दीर्घ एवं मंगलमय संयम जीवन की कामना की।

धर्मसभा में डॉ. वरुण मुनि ने कहा कि जीवन में महान बनने के लिए केवल इच्छा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि पुरुषार्थ करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती बनने के लिए पुण्य योग की आवश्यकता होती है, लेकिन भगवान बनने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है।

उन्होंने भगवान महावीर के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान महावीर ने भी कठोर तप और अनेक कष्टों को सहन किया, जिसके बाद वे भगवान बने। उन्होंने कहा कि आत्मबल को मजबूत करने के लिए व्यक्ति को अपने शरीर से अधिक अपनी आत्मा की शक्ति बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

डॉ. वरुण मुनि ने धर्मसभा में राजा हरिश्चंद्र और रानी तारा की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जीवन में रानी तारा को भी अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने चरित्र और धर्म से समझौता नहीं किया।

उन्होंने कहा कि रानी तारा को दासी के रूप में जीवन बिताना पड़ा और अपने पुत्र के साथ एक कुटिया में रहकर जो भोजन मिलता, उसी से दोनों गुजारा करते थे। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांतों को नहीं छोड़ा।

डॉ. वरुण मुनि ने कहा कि महिलाओं को किसी भी प्रकार के प्रलोभन में आकर अपने धर्म और चरित्र से समझौता नहीं करना चाहिए। जीवन में जब भी चरित्र और सम्मान पर संकट आए, तब व्यक्ति को मजबूती से उसका सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान और चरित्र की रक्षा जीवन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

डॉ. वरुण मुनि ने युवाचार्य महेंद्र ऋषि की जन्म जयंती पर कहा कि चातुर्मास के पश्चात पालीवासियों को भी युवाचार्य के दर्शन और सान्निध्य का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि युवाचार्य सादड़ी भी पधारेंगे। संतों और श्रद्धालुओं ने उनके अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घ संयम जीवन तथा उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की।

कार्यक्रम में मंत्री प्रकाश कटारिया ने युवाचार्य महेंद्र ऋषि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे गुरुवर सम्राट आनंद ऋषि महाराज की परंपरा के ज्ञानी एवं प्रखर संत हैं। उन्होंने युवाचार्य महेंद्र ऋषि के चरणों में कोटि-कोटि वंदन करते हुए उनके तप, त्याग और साधना की अनुमोदना की।

उन्होंने बताया कि युवाचार्य महेंद्र ऋषि का जन्म 5 अक्टूबर 1967 को अहमदनगर के गांव चाकन में लीला देवी के घर हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म और आध्यात्मिक जीवन की ओर रहा। वे आचार्य आनंद ऋषि महाराज के संपर्क और सान्निध्य में रहे।

मंत्री प्रकाश कटारिया ने बताया कि युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने मात्र 15 वर्ष की उम्र में 3 अक्टूबर 1982 को संयम पथ पर कदम रखते हुए दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद उन्होंने गुरुसेवा, तपस्या, स्वाध्याय और साधना को अपने जीवन का आधार बनाया।

उन्होंने कहा कि गुरु ने उनकी निष्ठा, लगन, तप और समर्पण को देखते हुए उन्हें युवाचार्य पद से सुशोभित किया। आज उनकी जन्म जयंती पर पाली संघ की ओर से उनकी विशेष अनुमोदना एवं वंदन किया जा रहा है।

जन्म जयंती कार्यक्रम में बाहर से आए अतिथियों एवं गुरु भक्तों का भी संघ की ओर से स्वागत किया गया। श्रद्धालुओं ने युवाचार्य महेंद्र ऋषि के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके दीर्घ एवं मंगलमय संयम जीवन की कामना की।

कार्यक्रम के अंत में गुरुदेव की ओर से श्रद्धालुओं को पंचखाण दिलाया गया। धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक धार्मिक भावना के साथ युवाचार्य महेंद्र ऋषि की जन्म जयंती की अनुमोदना की और जिन शासन की सेवा में उनके निरंतर आगे बढ़ने की मंगलकामना की।

Rajasthan Today

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