पाली : ‘मरु निनाद’ घोष शिविर का निमंत्रण देने निकले स्वयंसेवक, मंदिरों में वादन कर भगवान शिव को किया आमंत्रित

पाली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जोधपुर प्रांत में आगामी प्रांत स्तरीय घोष शिविर ‘मरु निनाद’ के आयोजन को लेकर रविवार शाम पाली नगर में घोष निमंत्रण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पूर्ण गणवेश में सजे संघ के प्रगत घोषवादक स्वयंसेवकों ने अनुशासित कदमताल के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से संचलन किया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों से निकली सुमधुर और ओजस्वी धुनों ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। संचलन के दौरान स्वयंसेवक गोपीनाथ जी मंदिर और सोमनाथ महादेव मंदिर पहुंचे, जहां घोष वादन के साथ भगवान शिव को विधिवत निमंत्रण अर्पित किया गया।
जिला संघचालक नेमीचंद अखावत ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5 बजे सोमनाथ संघ कार्यालय से हुई। घोष निमंत्रण कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को आगामी ‘मरु निनाद’ प्रांत घोष शिविर की जानकारी देना और समाज को इस आयोजन में सहभागिता के लिए आमंत्रित करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से 12 से 15 नवंबर तक जोधपुर के शिकारपुरा स्थित संत राजाराम तीर्थ धाम में ‘मरु निनाद’ प्रांत घोष शिविर आयोजित किया जाएगा। शिविर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रांत स्तरीय आयोजन में 5,000 घोषवादकों की सहभागिता का लक्ष्य रखा गया है। पाली से भी बड़ी संख्या में घोषवादक इस शिविर में भागीदारी करेंगे। इसी क्रम में शहर में घोष निमंत्रण कार्यक्रम आयोजित कर आगामी आयोजन के प्रति लोगों को जानकारी दी गई।
घोष निमंत्रण संचलन में स्वयंसेवकों ने संघ घोष में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न पारंपरिक वाद्य यंत्रों का सामंजस्यपूर्ण वादन प्रस्तुत किया। इनमें आनक, प्रणव, शंख, शृंग, वेणु और त्रिभुज प्रमुख रूप से शामिल रहे। वाद्य यंत्रों के समन्वय और स्वयंसेवकों की अनुशासित प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप दिया।
वादन के दौरान स्वागत प्रणाम और ध्वज प्रणाम के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत पर आधारित कई रचनाएं प्रस्तुत की गईं। इनमें भूप, मीरा, शिवरंजनी, हंसध्वनि, किरण, श्रीराम, सोनभद्र, गायत्री, बंग श्री, चेतक, शिवराज और मेवाड़ जैसी रचनाएं शामिल थीं। घोष की धुनों के बीच स्वयंसेवकों ने निर्धारित ताल और लय के साथ अपनी वादन कला का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में वादन की गुणवत्ता और प्रस्तुति में एकरूपता बनाए रखने के लिए घोषवादक स्वयंसेवकों की न्यूनतम पात्रता भी निर्धारित की गई थी। इसके तहत आनक और ताल में कम से कम पांच-पांच रचनाओं का अभ्यास आवश्यक रखा गया था। वहीं वेणु यानी वंशी और शंख में न्यूनतम तीन-तीन रचनाओं का अभ्यास तथा शृंग वादन के लिए न्यूनतम स्वरपाठ का ज्ञान अनिवार्य किया गया था।
निर्धारित मापदंडों को पूरा करने वाले प्रगत घोषवादकों ने कार्यक्रम में भाग लिया। स्वयंसेवकों के वादन में तालमेल, अनुशासन और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुति देखने को मिली।
सोमनाथ संघ कार्यालय से शुरू हुआ संचलन शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए गोपीनाथ जी मंदिर और सोमनाथ महादेव मंदिर पहुंचा। यहां स्वयंसेवकों ने घोष वादन कर भगवान शिव को आगामी शिविर के लिए विधिवत निमंत्रण अर्पित किया।
कार्यक्रम के माध्यम से ‘मरु निनाद’ घोष शिविर को लेकर पाली में जनसंपर्क किया गया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों और अनुशासित संचलन के जरिए स्वयंसेवकों ने आगामी प्रांत स्तरीय आयोजन की जानकारी आमजन तक पहुंचाई।



