google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशधार्मिकब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

पाली में चातुर्मास प्रवचन, ‘मानव जीवन मिलना दुर्लभ, लेकिन मानवता अपनाना उससे भी कठिन’

पाली : श्री रघुनाथ स्मृति जैन भवन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। इसमें पर्वर्तक गुरुदेव सुकन मुनि ने भगवान महावीर के संदेशों को जीवन में उतारने, श्रद्धा और विश्वास बनाए रखने तथा मानवता के गुण अपनाने का आह्वान किया। वहीं डॉ. वरुण मुनि ने प्रवचन के दौरान मनुष्य जीवन की दुर्लभता और मानवता को धारण करने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

गुरुदेव सुकन मुनि ने कहा कि भगवान महावीर की वाणी का श्रवण करने के साथ उसका चिंतन करना और उसे अपने जीवन में अपनाना आवश्यक है। व्यक्ति को समय-समय पर आत्ममंथन करना चाहिए कि उसके भीतर मानवता, करुणा और सद्भाव जैसे गुण विकसित हो रहे हैं या नहीं। मानवता का गुण जीवन में आ जाए तो व्यक्ति स्वयं को सौभाग्यशाली मान सकता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में सच्ची श्रद्धा और विश्वास प्राप्त होना दुर्लभ है। जिस व्यक्ति के मन में आस्था और विश्वास मजबूत होते हैं, उसके कार्यों में भी स्थिरता आती है। पति-पत्नी के रिश्ते का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास ही संबंधों को मजबूत बनाता है। इसी प्रकार जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य जीवन 84 लाख योनियों में भटकने के बाद प्राप्त होने वाला दुर्लभ अवसर माना गया है। इस संसार में धन-संपत्ति और दूसरी भौतिक वस्तुएं यहीं रह जाती हैं, व्यक्ति अपने साथ कुछ लेकर नहीं जाता। इसलिए भगवान की वाणी को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे आचरण में उतारना चाहिए। ऐसा करने से जीवन को सही दिशा मिलती है।

इससे पूर्व डॉ. वरुण मुनि ने अपने प्रवचन में तीसरे अध्याय के पहले गाथा प्रसंग के माध्यम से चार दुर्लभ अंगों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ उपलब्धियां ऐसी होती हैं, जिन्हें प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को लंबे समय तक पुरुषार्थ करना पड़ता है। मनुष्य जीवन प्राप्त होना अपने आप में दुर्लभ है, लेकिन मनुष्य बनने के साथ-साथ अपने व्यवहार में मानवता लाना उससे भी बड़ी साधना है।

उन्होंने एक चक्रवर्ती राजा और ब्राह्मण की कथा सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार एक व्यक्ति को पर्याप्त अवसर और सुविधाएं मिलने के बावजूद उसकी इच्छाएं और चिंताएं उसे संतुष्ट नहीं होने देतीं। कथा के माध्यम से उन्होंने समझाया कि धन-संपत्ति और सुख-सुविधाओं की इच्छा में व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है। इसलिए मनुष्य को यह विचार करना चाहिए कि उसे मिला दुर्लभ जीवन किस प्रकार सार्थक बनाया जाए।

डॉ. वरुण मुनि ने कहा कि मानवता का अर्थ केवल मनुष्य के रूप में जन्म लेना नहीं है, बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना, किसी का बुरा नहीं करना और सत्य के मार्ग पर चलना भी है। उन्होंने कहा कि कई बार व्यक्ति अपने परिवार और आसपास के लोगों के बीच रहते हुए भी मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज कर देता है। ऐसे में आत्मचिंतन जरूरी है कि हम अपने व्यवहार से दूसरों के लिए कितने उपयोगी बन रहे हैं।

प्रवचन में डॉ. वरुण मुनि ने इंद्रियों पर नियंत्रण रखने, कटु वचन नहीं बोलने, किसी का अहित नहीं करने और सत्य का पालन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को केवल धन कमाने और अपनी इच्छाएं पूरी करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि अपने आचरण और कर्मों को भी बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की वाणी सुनने का अवसर मिलना भी महत्वपूर्ण है। धर्म के प्रति श्रद्धा और विश्वास ऐसे होने चाहिए कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर भी व्यक्ति अपने सिद्धांतों से विचलित न हो। नवकार मंत्र और धर्म के प्रति निष्ठा को जीवन में बनाए रखने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची आस्था कठिन समय में भी व्यक्ति को संबल देती है।

डॉ. वरुण मुनि ने पराक्रम के विषय में कहा कि वास्तविक पराक्रम केवल शारीरिक शक्ति या बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने दोषों पर विजय पाने में भी है। क्रोध, लोभ और अहंकार जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण करना तथा सही मार्ग पर चलने का साहस रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि महापुरुषों को उनके कर्मों और त्याग के कारण आज भी याद किया जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसा आचरण अपनाने का प्रयास करना चाहिए, जिससे उसका जीवन स्वयं के साथ दूसरों के लिए भी उपयोगी बन सके।

प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने नवकार मंत्र का जाप करने के बाद ही भोजन ग्रहण करने का पचक्खाण (संकल्प) भी करवाया। इससे धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को नियमित धार्मिक साधना और अनुशासन अपनाने की प्रेरणा मिली।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री प्रकाश कटारिया ने संघ की ओर से मद्रास से आए 125 भक्तों के साथ महेंद्र जी खींवसरा, राठौड़ परिवार और अन्य गुरु भक्तों का स्वागत करवाया। चातुर्मास कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने प्रवचन सुनकर धर्म, संयम, श्रद्धा और मानवता के संदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button