google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

पाली में दिव्यांग शिक्षक का जज्बा, खुद वोट डाला, फिर व्हीलचेयर पर दिव्यांग मतदाताओं को पहुंचाया बूथ तक

पाली : लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रत्येक मतदाता की भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है, इसकी प्रेरणादायी मिसाल पाली पंचायत समिति क्षेत्र के भांवरी गांव में देखने को मिली। यहां एक दिव्यांग पंचायत शिक्षक ने पहले स्वयं मतदान कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया और इसके बाद दूसरे दिव्यांग मतदाताओं को भी मतदान के लिए प्रेरित करते हुए उनकी मदद की। उन्होंने कई दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर पर बैठाकर मतदान केंद्र तक पहुंचाया और उनका मतदान करवाने में सहयोग किया।

पंचायत शिक्षक जालम सिंह का यह प्रयास न केवल मतदान के प्रति जागरूकता का उदाहरण बना, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया कि लोकतंत्र में हर मत की अहमियत है और शारीरिक चुनौतियां भी अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण को कमजोर नहीं कर सकतीं।

रिटर्निंग अधिकारी एवं उपखंड अधिकारी पाली विमलेन्द्र सिंह राणावत ने बताया कि पंचायती राज आम चुनाव के तहत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भांवरी में मतदान केंद्र स्थापित किया गया था। इसी केंद्र पर दिव्यांग पंचायत शिक्षक जालम सिंह ने सबसे पहले अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

मतदान करने के बाद उन्होंने अन्य दिव्यांग मतदाताओं को भी वोट डालने में सहायता करने का निर्णय लिया। जालम सिंह ने कई दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर पर बैठाकर मतदान केंद्र तक पहुंचाया और मतदान प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने में सहयोग किया।

मतदान के दौरान दिव्यांगजनों के सामने मतदान केंद्र तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में जालम सिंह ने आगे आकर उनकी मदद की और उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी इस पहल ने सामाजिक जिम्मेदारी और आपसी सहयोग की भावना को उजागर किया। उन्होंने अपने कार्य से यह साबित किया कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए केवल मतदान करना ही नहीं, बल्कि दूसरों को भी मतदान के लिए प्रेरित करना जरूरी है।

जालम सिंह का यह प्रयास मतदान के प्रति जागरूकता, सामाजिक सरोकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया। उनका संदेश स्पष्ट है कि लोकतंत्र में हर मत महत्वपूर्ण है और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।

भांवरी गांव में दिव्यांग शिक्षक की इस पहल ने मतदान के महत्व को रेखांकित करते हुए यह प्रेरणा दी कि परिस्थितियां कैसी भी हों, लोकतंत्र के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करने का जज्बा हमेशा कायम रहना चाहिए।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button