पाली जिला कारागृह का औचक निरीक्षण, बंदियों से सीधे संवाद कर जानी सुविधाओं और कानूनी सहायता की स्थिति

पाली : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने मंगलवार को पाली जिला कारागृह का औचक निरीक्षण कर बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और कानूनी सहायता व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक जानकारी भी प्रदान की।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार किए गए इस निरीक्षण के दौरान जिला कारागृह में कुल 99 बंदी निरुद्ध पाए गए। सचिव भाटी ने भोजन व्यवस्था, पेयजल उपलब्धता, चिकित्सीय सुविधाएं, स्वच्छता और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं के संबंध में बंदियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान सचिव भाटी ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर अथवा निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ व्यक्तियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी बंदी केवल कानूनी सहायता के अभाव में जेल में निरुद्ध न रहे।
इसके अलावा ऐसे मामलों की भी जानकारी ली गई जिनमें जमानत आदेश जारी होने के बावजूद किसी कारणवश बंदी कारागृह में निरुद्ध हैं। बंदियों को उनके न्यायालयीन प्रकरणों की वर्तमान स्थिति से भी अवगत कराया गया।
सचिव भाटी ने नवआगंतुक बंदियों से अलग से बातचीत कर घटना अथवा कथित अपराध के समय उनकी आयु के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इसका उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम एवं अन्य विधिक प्रावधानों के तहत पात्र व्यक्तियों को आवश्यक संरक्षण और कानूनी लाभ उपलब्ध कराना रहा।

निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन ने बताया कि सभी बंदियों की नियमित रूप से ओपीडी समय में स्वास्थ्य जांच की जाती है। किसी भी गंभीर अथवा आपात स्थिति में बंदियों को तत्काल राजकीय बांगड़ चिकित्सालय, पाली रेफर किया जाता है। सचिव भाटी ने जेल डिस्पेंसरी की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान कारापाल जोराराम, जेल चिकित्सक डॉ. एम.एल. सालोदिया, जेल विजिटिंग लॉयर अल्ताफ हुसैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की इस पहल को बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा, न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने और जेल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



