लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से मजबूत हुआ लोकतंत्र, युवा पीढ़ी उनके त्याग से ले प्रेरणा : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

पाली। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आपातकाल के दौर में लोकतंत्र सेनानियों द्वारा तानाशाही के विरुद्ध किया गया संघर्ष भारतीय लोकतंत्र की रक्षा की एक ऐतिहासिक गाथा है। लोकतंत्र सेनानियों का त्याग, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों का आह्वान किया कि वे अपने अनुभवों को समाज के साथ साझा करते हुए नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक एवं समर्पित बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री जयपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित तिरंगा सम्मान समारोह में प्रदेशभर से विशेष आमंत्रित लोकतंत्र सेनानियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पाली जिले से भी पांच लोकतंत्र सेनानियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि देश को आजादी अनेक पीढ़ियों के बलिदान और संघर्ष के बाद मिली। इसी प्रकार आपातकाल के दौरान लोकतंत्र सेनानियों ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए लोकतंत्र, संविधान, मौलिक अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की तपस्या और संघर्ष ने लोकतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूती प्रदान की। आज की युवा पीढ़ी को यह समझने की आवश्यकता है कि उसे जो लोकतांत्रिक व्यवस्था सहज रूप से प्राप्त हुई है, उसके पीछे असंख्य लोगों का त्याग, संघर्ष और बलिदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों से अपने जीवन के अनुभवों एवं संघर्षों को लिखित रूप में दर्ज करने का भी आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस दौर के संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को जान सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी लोकतंत्र सेनानियों के योगदान एवं अनुभवों को सुरक्षित रखने की दिशा में कार्य करेगी।
लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं पाली के लोकतंत्र सेनानी मेघराज बम्ब ने समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष लोकतंत्र सेनानियों से जुड़ी विभिन्न मांगें रखीं।
बम्ब ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। ऐसे अनुभवी एवं समाज के प्रति समर्पित लोकतंत्र सेनानियों की सेवाओं का उपयोग सरकारी व्यवस्था में भी किया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि लोकतंत्र सेनानियों को उनकी योग्यता एवं अनुभव के आधार पर विभिन्न सरकारी कमेटियों में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी दी जाए। इससे सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जनभागीदारी को और मजबूती मिल सकती है।
प्रदेश अध्यक्ष मेघराज बम्ब ने राज्य सरकार से यह भी मांग की कि प्रदेश के सभी लोकतंत्र सेनानियों के निधन पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किए जाने के संबंध में स्पष्ट सरकारी आदेश जारी किया जाए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके योगदान और संघर्ष को स्थायी रूप से सम्मान एवं स्मृति के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए।
जयपुर में आयोजित समारोह में पाली जिले से पांच लोकतंत्र सेनानियों को विशेष निमंत्रण दिया गया था। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर सभी आमंत्रित लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। प्रवेश के दौरान उन्हें साफा एवं दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया। साथ ही राजस्थान सरकार की उपलब्धियों एवं कार्यों से संबंधित पुस्तकें भी भेंट की गईं।
समारोह में लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष, उनके योगदान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को याद किया गया। कार्यक्रम ने आपातकाल के दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।



