ईमानदारी से समझौता नहीं, चाहे कितनी भी कठिन हो राह: डॉ. वरुण मुनि

पाली : श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में रघुनाथ स्मृति भवन में चल रहे गुरु द्वय जन्म जयंती समारोह के सात दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन धार्मिक प्रवचन, गोसेवा और जरूरतमंदों की सेवा सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। चातुर्मास कार्यक्रम के तहत आयोजित समारोह में साधु-साध्वियों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया।
प्रवचन के दौरान डॉ. वरुण मुनि ने गुरुदेव श्री मिश्रीमलजी महाराज के बाल्यकाल और उनके जीवन में संस्कारों एवं ईमानदारी के महत्व का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि परिवार में ईमानदारी की कमाई का पैसा आना चाहिए, तभी परिवार सुखी रह सकता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, व्यक्ति को ईमानदारी और स्वाभिमान से समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने गुरुदेव के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके पिता मेहता साहब एक राजा के यहां नौकरी करते थे और पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से अपना कार्य करते थे। इसी कारण कुछ लोग उनसे विरोध रखने लगे और राजा के कान भरने लगे। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि मेहता साहब को नौकरी छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने अपने पुत्र मिश्री से भी इस निर्णय के बारे में सहमति ली।
डॉ. वरुण मुनि ने बताया कि उस समय महज 13 वर्ष की आयु के बालक मिश्री ने असाधारण परिपक्वता का परिचय देते हुए अपने पिता से कहा कि जहां ईमानदारी से समझौता करना पड़े, वहां एक पल भी नहीं रहना चाहिए। चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, वह अपने पिता के निर्णय में उनके साथ रहेंगे। इसी स्वाभिमान और संस्कार के साथ परिवार पाली की ओर रवाना हुआ।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों के जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियां आगे चलकर उनके व्यक्तित्व को महान बनाने का माध्यम बनती हैं। कर्म के कारण कभी-कभी व्यक्ति को स्थान बदलना पड़ता है, लेकिन वही परिवर्तन उसके जीवन में नई दिशा लेकर आता है। पाली आने के बाद मेहता परिवार ने स्वयं का व्यापार शुरू किया और धीरे-धीरे परिस्थितियां बेहतर होती गईं।
डॉ. वरुण मुनि ने बताया कि गुरुदेव का जीवन प्रारंभ से ही संघर्ष, परिश्रम और संस्कारों से भरा रहा। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और दो वर्ष के पाठ्यक्रम को महज छह माह में पूरा कर लिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के जीवन में आगे चलकर वैराग्य का भाव किस प्रकार प्रबल हुआ, इसकी प्रेरक गाथा आगामी प्रवचनों में श्रद्धालुओं को सुनाई जाएगी।
इस अवसर पर गुरुदेव सुकन मुनि ने कहा कि पालीवासियों का सौभाग्य है कि गुरु द्वय की जन्म जयंती पाली की पावन भूमि पर मनाई जा रही है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सात दिवसीय आयोजन का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संसार सागर से पार उतरने के लिए जीवन में अच्छे संस्कारों और भक्ति को अपनाना जरूरी है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी भक्ति और साधना को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने तीन सूत्रों—त्याग, कम खाना और नम्र रहना—को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को गुणवान बनने के साथ व्यवहार में विनम्रता रखनी चाहिए, ताकि समाज उसे उसके अच्छे व्यवहार के लिए याद करे।
गुरु द्वय जन्म जयंती के दूसरे दिन श्री मरुधर केसरी मित्र मंडल की ओर से सेवा गतिविधियां भी आयोजित की गईं। मंडल के सदस्यों ने राजेंद्र नगर स्थित शिव नंदी गौशाला पहुंचकर गौमाता को लापसी एवं चारा खिलाया। इस सेवा कार्य के लाभार्थी सज्जन राज, नितिन कुमार एवं अंकित कुमार गुलेचा रहे।
इसके बाद मंडल की ओर से चिमनपुरा स्थित मंदबुद्धि दिव्यांग सेवा संस्थान, मानसिक विमंदित पुनर्वास गृह रामसिया में भोजन वितरण किया गया। इस दौरान मंडल के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। धार्मिक आयोजन के साथ सेवा कार्यों के माध्यम से समाज में जीवदया, करुणा और मानव सेवा का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में मंडल के मंत्री प्रकाश कटारिया ने शनिवार को आयोजित होने वाले तीसरे दिन के कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुरु द्वय जन्म जयंती समारोह के सात दिवसीय आयोजन के तहत 22 अगस्त को विभिन्न सेवा एवं धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
तीसरे दिन पाली सेवा मंडल, नया गांव के सहयोग से मेडिकल कैंप आयोजित किया जाएगा, जिसके लाभार्थी देवीचंदजी पारसमलजी भंसाली परिवार, धुंधाड़ा वाला, पाली रहेंगे। इसके अलावा तीन-तीन सामायिक, प्रवचन प्रभावना और सामूहिक एकासन के आयोजन भी होंगे।
तीन सामायिक के लाभार्थी सुमेरचंदजी, विशालजी, विकासजी, अमितजी एवं अभिषेकजी चौपड़ा परिवार रहेंगे। प्रवचन प्रभावना का लाभ नरेन्द्र कुमारजी, कुशलराजजी एवं प्रदीपजी सुराणा (पंच) परिवार लेंगे। सामूहिक एकासन के लाभार्थी नेमीचंदजी, विनीतजी एवं मोक्षीलजी छाजेड़ परिवार रहेंगे। एकासन की व्यवस्था जैन भवन, किलंगा पोल में रहेगी, जबकि मुख्य आयोजन श्री रघुनाथ स्मृति जैन भवन, रूई कटला, पाली में आयोजित होंगे।
समारोह मरुधरा भूषण पूज्य प्रवर्तक श्री सुकन मुनिजी महाराज, तपस्वी रत्न ज्योतिष सम्राट उपप्रवर्तक श्री अमृत मुनिजी महाराज आदि ठाणा-5 तथा सरलमना महासतीजी श्री उमरावकंवरजी महाराज एवं महासतीजी श्री डॉ. प्रीतिसुधाजी महाराज आदि ठाणा-3 के पावन सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है। सात दिवसीय आयोजन में धार्मिक प्रवचन, सामायिक, सेवा, चिकित्सा शिविर एवं अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म और सेवा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।



