जिला कारागृह में अचानक पहुंचे विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, 114 बंदियों से किया संवाद

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने मंगलवार को जिला कारागृह पाली का आकस्मिक निरीक्षण किया। अचानक हुए निरीक्षण के दौरान कारागृह में कुल 114 बंदी निरुद्ध पाए गए।
निरीक्षण के दौरान सचिव भाटी ने बंदियों से सीधे संवाद करते हुए कारागृह में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बंदियों से भोजन की गुणवत्ता, चिकित्सकीय सुविधाओं, पेयजल, साफ-सफाई सहित अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
सचिव विक्रम सिंह भाटी ने निरीक्षण के दौरान अलग-अलग बंदियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि कारागृह में बंदियों को किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं है और उन्हें आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हो रही हैं या नहीं।
बंदियों से बातचीत के दौरान भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल और स्वच्छता से जुड़े विषयों पर भी जानकारी ली गई। निरीक्षण का उद्देश्य कारागृह में बंदियों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना रहा।
निरीक्षण के दौरान ऐसे बंदियों के बारे में भी जानकारी ली गई, जो आर्थिक या अन्य कारणों से निजी अधिवक्ता करने में सक्षम नहीं हैं अथवा विधिक सहायता के अभाव में बिना अधिवक्ता के कारागृह में निरुद्ध हैं।
ऐसे बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि पात्र बंदी अपने प्रकरण की पैरवी के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
सचिव ने उन बंदियों की स्थिति के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की, जिनकी जमानत स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन किसी कारणवश वे अभी भी कारागृह में निरुद्ध हैं।
उन्होंने बंदियों के प्रकरणों की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी ली तथा संबंधित बंदियों को उनके मामलों की स्थिति से अवगत कराया। इस दौरान यह भी समझने का प्रयास किया गया कि विधिक प्रक्रिया से जुड़ी किसी जानकारी के अभाव में किसी बंदी को अनावश्यक परेशानी का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान कारागृह में हाल ही में आए नवागंतुक बंदियों से भी वार्ता की गई। उनसे घटना अथवा आरोपित अपराध के समय उनकी आयु के संबंध में आवश्यक जानकारी ली गई।
यह जानकारी बंदियों से जुड़े विधिक अधिकारों एवं प्रकरणों की प्रक्रिया के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जाती है। सचिव ने बंदियों से बातचीत करते हुए उनकी व्यक्तिगत समस्याओं और आवश्यकताओं को भी जाना।
निरीक्षण के दौरान बंदियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच एवं उपचार से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई। कारागृह प्रशासन की ओर से बताया गया कि सभी बंदियों की ओपीडी के दौरान स्वास्थ्य जांच की जाती है।
किसी बंदी की स्थिति गंभीर होने अथवा आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता होने पर उसे उपचार के लिए राजकीय बांगड़ अस्पताल, पाली रेफर किए जाने की व्यवस्था है।
सचिव ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रबंधों की जानकारी लेते हुए बंदियों के स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान देने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।
आकस्मिक निरीक्षण के दौरान कारागृह में उपलब्ध पेयजल, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी जायजा लिया गया। बंदियों से इन सुविधाओं के संबंध में सीधे फीडबैक लिया गया, ताकि व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से समय-समय पर किए जाने वाले ऐसे निरीक्षणों का उद्देश्य बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के साथ-साथ कारागृह में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा करना भी है। निरीक्षण के दौरान जिला कारागृह पाली के कारापाल जोराराम तथा जेल विजिटिंग लॉयर अल्ताफ हुसैन सहित संबंधित अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को जाना गया तथा विधिक सहायता से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई। इससे बंदियों को अपने प्रकरणों और कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।



