
पाली : श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को विजयदशमी के अवसर पर विशेष धार्मिक प्रवचन सभा आयोजित हुई। सभा में गुरुदेव सुकन मुनि ने भगवान श्रीराम की विजय का उल्लेख करते हुए कहा कि विजयदशमी हमें अपने जीवन को विजयी बनाने की प्रेरणा देती है। मनुष्य को केवल बाहरी बुराइयों पर ही नहीं, बल्कि अपने भीतर बसे अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों पर भी विजय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखने वाले आचार्य सम्राट भूधर जी महाराज की जन्म जयंती एवं निर्वाण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया। साथ ही युवा संत डॉ. वरुण मुनि का दीक्षा दिवस भी मनाया गया। कार्यक्रम में संतों ने धर्म, तपस्या, गुरु भक्ति, संयम और त्याग के महत्व पर प्रकाश डाला। श्रावक-श्राविकाओं ने प्रवचनों का लाभ लिया तथा संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
गुरुदेव सुकन मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि आज विजयदशमी का पावन दिवस है। भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इस पर्व से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने और बुराइयों पर विजय प्राप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जैन समाज में जैन नवरात्रि एवं नवपद ओली के अंतर्गत जप, तप और आयंबिल जैसी धार्मिक साधनाएं चल रही हैं। ऐसे धार्मिक अवसर आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने आचार्य सम्राट भूधर जी महाराज के जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि महान संतों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

सभा में आचार्य सम्राट भूधर जी महाराज के जीवन, त्याग, साधना और धर्म प्रचार पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में जैन धर्म की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके प्रयासों से मारवाड़, मालवा, गुजरात और दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ी।
उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर दीक्षा ग्रहण की और गुरु परंपरा में रहकर आध्यात्मिक साधना की। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में चातुर्मास और धार्मिक प्रवचनों के माध्यम से समाज को धर्म, संयम और सदाचार का संदेश दिया।
वक्ताओं ने बताया कि आचार्य भूधर जी महाराज की शिष्य परंपरा ने भी जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रमुख शिष्यों में आचार्य जयमल जी, आचार्य रघुनाथ जी और आचार्य कौशिक जी सहित अन्य संतों का उल्लेख किया गया। इसी परंपरा में मरुधर केसरी मिश्रीमल जी महाराज का भी विशेष स्थान बताया गया, जिनके माध्यम से श्रावक संघ की शिक्षाओं और धार्मिक विचारों का व्यापक प्रचार हुआ।
सभा में कहा गया कि आचार्य भूधर जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, गुरु भक्ति और धर्मनिष्ठा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनकी जन्म जयंती और निर्वाण दिवस पर उनके आदर्शों को स्मरण करना समाज के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का अवसर है।
कार्यक्रम में साध्वी प्रीतिसुधा ने भी आचार्य भूधर जी महाराज के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने श्रीपाल की कथा के माध्यम से सदाचार, धर्म और जीवन में सही मार्ग अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने नीति और मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने आचरण में दया, करुणा और विवेक बनाए रखना चाहिए। शरण में आए व्यक्ति, रोगी, निर्बल और असहाय के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। गुरुजनों, बच्चों और महिलाओं के प्रति भी सम्मान तथा संरक्षण की भावना रखनी चाहिए। उनके प्रवचनों में अहिंसा और मानवीय मूल्यों को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
इसके बाद डॉ. वरुण मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के नौवें अध्याय का वाचन किया। उन्होंने कथा प्रसंग के माध्यम से बताया कि जब किसी व्यक्ति के मन में वैराग्य का भाव जागृत होता है, तो कई बार परिवार और सांसारिक मोह उसे उस मार्ग पर आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास करते हैं। इसके बावजूद दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक प्रेरणा से व्यक्ति संयम का मार्ग अपना सकता है।
उन्होंने राजर्षि बनने की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि सांसारिक वैभव के बीच भी मनुष्य के भीतर वैराग्य जागृत हो सकता है। सच्चा परिवर्तन तब आता है, जब व्यक्ति अपने मन की बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है।
डॉ. वरुण मुनि ने कहा कि हमें अपने भीतर बसे रावण अर्थात अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य विकारों का अंत करना चाहिए। संतों का जीवन हमें सिखाता है कि आत्मसंयम, साधना और गुरु के प्रति समर्पण से जीवन को सही दिशा दी जा सकती है।
अपने दीक्षा दिवस के अवसर पर डॉ. वरुण मुनि ने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गुरुदेव की कृपा और मार्गदर्शन से उन्हें धर्म तथा आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। पिछले नौ वर्षों में जप, तप और तपस्या के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन को साधना के लिए समर्पित करने का प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि गुरु की सेवा, सत्संग और उनके सानिध्य से जीवन में अनेक महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं। प्रवचन देना आसान कार्य नहीं है, लेकिन गुरुजनों की कृपा और श्रावक-श्राविकाओं के प्रोत्साहन से उन्हें धर्म संदेश प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने अपने जीवन में गुरु के मार्गदर्शन को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की।
इस अवसर पर डॉ. वरुण मुनि के दीक्षा जीवन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की मंगलकामना की गई।
गुरुदेव अमृत मुनि ने अपने संबोधन में आचार्य भूधर जी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि आचार्य भूधर जी महाराज ने मारवाड़, मालवा, गुजरात और दिल्ली सहित विभिन्न क्षेत्रों में धर्म की जागृति के लिए कार्य किया। उनके जीवन और उपदेशों ने अनेक लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
उन्होंने डॉ. वरुण मुनि के बचपन में दिखाई दिए वैराग्य भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें दीक्षा देकर संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया गया। आज वे अपने आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने डॉ. वरुण मुनि के स्वस्थ, दीर्घ और मंगलमय जीवन की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान संपत जी और विकास संचेती ने आचार्य भूधर जी महाराज के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित गीतिका प्रस्तुत की। गीतिका के माध्यम से संत परंपरा, त्याग और धर्म प्रचार के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के मंत्री प्रकाश कटारिया ने आचार्य सम्राट भूधर जी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें महान संत बताया। उन्होंने कहा कि आचार्य भूधर जी महाराज के योगदान से मारवाड़ में श्रावक संघ की धार्मिक गतिविधियों को नई दिशा मिली। उनकी शिष्य परंपरा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में धर्म का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने मरुधर केसरी मिश्रीमल जी महाराज की गुरु परंपरा का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को भी याद किया।
मंत्री प्रकाश कटारिया ने युवा संत एवं प्रखर वक्ता डॉ. वरुण मुनि के दीक्षा दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए उनके आध्यात्मिक जीवन में निरंतर प्रगति की कामना की। कार्यक्रम में बाहर से आए गुरु भक्तों का स्वागत किया गया।
इस प्रकार विजयदशमी के अवसर पर आयोजित प्रवचन सभा में आचार्य भूधर जी महाराज की जयंती एवं निर्वाण दिवस के साथ डॉ. वरुण मुनि का दीक्षा दिवस श्रद्धा और धार्मिक भावना के साथ मनाया गया। संतों के प्रवचनों में त्याग, तपस्या, अहिंसा, गुरु भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश दिया गया।



