विज्ञान भवन दिल्ली में गूंजा पाली के साहित्यकार का नाम, ललितेश कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘कालजयी’ का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विमोचन

पाली : राजस्थान के पाली जिले की साहित्यिक प्रतिभा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है। पाली के साहित्यकार ललितेश रंजना कुलश्रेष्ठ द्वारा रचित उपन्यास ‘कालजयी’ का नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित विज्ञान भवन में आयोजित विश्व हिंदी परिषद के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भव्य विमोचन किया गया। खास बात यह रही कि पूरे देश से चयनित केवल पांच साहित्यिक पुस्तकों में ‘कालजयी’ को स्थान मिला। इस उपलब्धि से पाली के साहित्यिक जगत में खुशी और गौरव का माहौल है।
विश्व हिंदी परिषद की ओर से 30 एवं 31 अक्टूबर 2026 को ‘भारत रत्न अटल : हिंदी राष्ट्रवाद और सुशासन’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। देश-विदेश के साहित्यकारों, हिंदी भाषा के विद्वानों, विचारकों और परिषद के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित इस सम्मेलन के विशेष हिंदी साहित्य पुस्तक विमोचन सत्र में उपन्यास ‘कालजयी’ का करतल ध्वनि के बीच विमोचन हुआ।

ललितेश कुलश्रेष्ठ का उपन्यास ‘कालजयी’ केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि समाज की सोच और संवेदनाओं को झकझोरने वाला सृजन है। इस उपन्यास के माध्यम से लेखक ने बेटियों के अस्तित्व, सम्मान और उनके अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को उठाया है।
उपन्यास में उन बेटियों की पीड़ा और संघर्ष को शब्द दिए गए हैं, जिन्हें कभी सामाजिक रूढ़ियों तो कभी संकीर्ण मानसिकता के कारण अपने अस्तित्व और पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ता है। लेखक ने अपनी रचना के जरिए समाज के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल रखा है कि जिस बेटी के बिना परिवार, समाज और सृष्टि की कल्पना अधूरी है, उसे अपने अस्तित्व और सम्मान के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ता है?
कृति में बेटियों को समान अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अवसर देने का संदेश दिया गया है। सम्मेलन में मौजूद साहित्यकारों एवं विचारकों ने उपन्यास के विषय और उसकी सामाजिक संवेदनशीलता की सराहना की।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे तथा विश्व हिंदी परिषद के अध्यक्ष एवं संसदीय राजभाषा समिति के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य थारलगडा लक्ष्मी प्रसाद सहित अन्य गणमान्य अतिथियों के उद्बोधन के साथ हुआ।
सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ लगभग 20 देशों से हिंदी साहित्यकार, विद्वान, हिंदी प्रचारक एवं परिषद के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान हिंदी भाषा और साहित्य के वैश्विक प्रचार-प्रसार, संरक्षण एवं विकास को लेकर विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रवादी चिंतन, हिंदी भाषा के प्रति उनके समर्पण और सुशासन की अवधारणा पर विशेष चर्चा हुई। देशभर से आए विद्वानों ने शोधपत्र, आलेख और संस्मरण प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर विश्व हिंदी परिषद की अधिकृत शोध पत्रिका ‘विश्व हिंदी अन्वेषिका’ का विशेषांक भी अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया गया। प्रत्येक तीन वर्ष में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का संयोजन परिषद के महासचिव डॉ. विपिन कुमार, उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्र एवं परिषद के समर्पित कार्यकर्ताओं ने किया।
साहित्यकार ललितेश कुलश्रेष्ठ की विशेषता यह भी है कि उन्होंने अपने उपन्यास में बेटियों के सम्मान और सशक्तीकरण का जो संदेश दिया है, उसे अपने निजी जीवन में भी अपनाया है। उन्होंने अपनी पत्नी रंजना कुलश्रेष्ठ को उच्च शिक्षा के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया और उनका सहयोग किया। आज वे प्रधानाचार्य के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
वहीं, अपनी दोनों बेटियों को भी समान अवसर और उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान की। वर्तमान में दोनों बेटियां बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनका परिवार इस बात का उदाहरण है कि बेटियों को शिक्षा, विश्वास और आगे बढ़ने के समान अवसर दिए जाएं तो वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर सकती हैं।

विज्ञान भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर उपन्यास ‘कालजयी’ का विमोचन पाली जिले की साहित्यिक प्रतिभा और रचनात्मक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देशभर से चयनित पांच पुस्तकों में शामिल होना इस कृति की विशिष्टता को दर्शाता है।
बेटियों के अस्तित्व, सम्मान और सशक्तीकरण जैसे संवेदनशील विषय को केंद्र में रखकर लिखे गए इस उपन्यास के माध्यम से ललितेश कुलश्रेष्ठ ने साहित्य को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाने का प्रयास किया है। पाली की धरती से निकली यह साहित्यिक अभिव्यक्ति जब अंतरराष्ट्रीय हिंदी मंच तक पहुंची तो जिले का गौरव भी बढ़ा। उपन्यास का मूल संदेश है कि बेटियों को केवल जीवन ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा और अपने सपनों को पूरा करने की पूरी आजादी भी मिलनी चाहिए।



