
पाली : शादी के तीन साल बाद एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे पाली जिले को झकझोर दिया है। जोधपुर के एमबीएम हॉस्पिटल में शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान 32 वर्षीय खुशबू राजपुरोहित ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर जहर देकर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।
मृतका के भाई इन्द्रजीत राजपुरोहित का कहना है कि खुशबू को शादी के बाद से ही बांझपन और कम दहेज लाने के ताने दिए जाते थे। दहेज में कार नहीं देने को लेकर उसे अक्सर अपमानित किया जाता था। मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर अंततः उसे मौत के मुंह में धकेल दिया गया।
इन्द्रजीत की आंखों में आंसू छलकते हुए बोले — “मेरी लाडली बहन को दहेज के लोभियों ने जहर देकर मार दिया। जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, हम शव नहीं उठाएंगे। मेरी बस यही मांग है कि बहन के हत्यारों को सख्त सजा मिले ताकि उसकी आत्मा को शांति मिले।”
खुशबू, पाली निवासी व्यापारी अमरसिंह राजपुरोहित की बेटी थी। उसकी शादी मई 2022 में पिलोवनी (जोधपुर) निवासी हर्षित सिंह, पुत्र चंदनसिंह के साथ हुई थी, जो जयपुर में सोलर बिजनेस करता है।
शादी के शुरुआती कुछ महीने ठीक रहे, लेकिन उसके बाद रिश्ते बिगड़ने लगे। हर्षित उसे अपने साथ जयपुर नहीं ले जाता था। खुशबू को सास और जेठानी दहेज व बांझपन को लेकर अपमानित करती थीं। मानसिक दबाव बढ़ने पर वह कुछ महीनों पहले अपने पीहर पाली लौट आई थी।
16 अक्टूबर को ससुराल पक्ष के लोग पाली पहुंचे और समाजजनों के सामने भरोसा दिया कि अब खुशबू को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी। परिजनों ने उस पर विश्वास करते हुए खुशबू को उनके साथ भेज दिया। लेकिन सिर्फ पांच दिन बाद ही 21 अक्टूबर को ससुराल से कॉल आया कि खुशबू ने “कुछ खा लिया” है और उसकी तबीयत खराब है।
खुशबू को जोधपुर के एमबीएम हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया, जहां वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझती रही। 24 अक्टूबर की सुबह उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने दहेज हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि गिरफ्तारी होने तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
खुशबू ने एमए और बीएसटीसी तक की पढ़ाई की थी और टीचर बनना उसका सपना था। वह चाहती थी कि नौकरी कर पति का सहयोग करे और आत्मनिर्भर बने, लेकिन ससुराल पक्ष की प्रताड़ना ने उसकी जिंदगी और सपनों दोनों को तोड़ दिया। फिलहाल खुशबू का शव एमबीएम हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है, जहां परिजन न्याय की मांग को लेकर डटे हुए हैं।



