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पाली : जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की तैयारी, उद्योगपतियों और प्रवासी पालीवासियों ने बढ़ाया सहयोग का हाथ

पाली : राज्य सरकार के “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के तहत जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया गया। कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों, प्रवासी पालीवासियों, उद्योगपतियों, भामाशाहों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेते हुए जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के लिए बड़े स्तर पर सहयोग देने की सहमति जताई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सी.आर. चौधरी ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है और जनभागीदारी से ही जल संकट का स्थायी समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण, भू-जल स्तर में वृद्धि, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना तथा आमजन को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है।

कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने जिले में पूर्व में किए गए जल संरक्षण कार्यों की जानकारी देते हुए ‘आओ गांव चले’ अभियान के तहत गठित ‘प्रवासी प्रकोष्ठ’ की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रवासी पालीवासियों से जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण से जुड़े कार्यों के लिए सुझाव आमंत्रित किए और घाणेराव क्षेत्र की 42 बावड़ियों को गोद लेने का आह्वान किया।

जिला प्रशासन ने कार्यशाला में उपस्थित उद्योगपतियों, सीएसआर कंपनियों और सामाजिक संगठनों से जीर्ण-शीर्ण बावड़ियों के जीर्णोद्धार, तालाबों की खुदाई, वाटर हार्वेस्टिंग, बोरवेल रिचार्ज और पौधारोपण जैसे कार्यों में सहयोग की अपील की।

कार्यक्रम में कई संस्थाओं और उद्योग समूहों ने बड़े स्तर पर सहयोग की घोषणा की। सेलो फाउंडेशन ने रानी, सुमेरपुर, बाली और देसूरी ब्लॉकों में तालाबों की सफाई और बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट निर्माण कराने की सहमति दी। वहीं नायरा एनर्जी लिमिटेड ने फार्म पॉन्ड, वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर और 20 हजार पौधे लगाने का प्रस्ताव रखा।

इसके अलावा खीमावत ट्रस्ट ने ग्रामीण विद्यालयों में 1500 टेबल-बेंच उपलब्ध कराने की घोषणा की, जबकि सूर्यज्योति टैक्सटाइल प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि अमरचंद समदड़िया ने नए तालाब के निर्माण में सहयोग देने की सहमति दी।

कार्यशाला में नदियों के पुनर्जीवन, नहरों की सफाई, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, एनीकट निर्माण, बोरवेल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और “हरियालो राजस्थान” अभियान के तहत व्यापक पौधारोपण जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने पर चर्चा हुई।

पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, जनप्रतिनिधि सुनील भण्डारी और पूर्व सभापति महेन्द्र बोहरा सहित कई गणमान्य नागरिकों ने भी कार्यशाला में अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन ने आमजन, सामाजिक संगठनों, उद्योगपतियों और प्रवासी पालीवासियों से जल संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

Rajasthan Today

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