google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

संविदा कर्मचारियों की नौकरी पर संकट, कर्मयोगी संगठन ने बुलाई आपात बैठक, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

पाली : राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच पाली में कर्मयोगी संगठन ने आपात बैठक आयोजित कर संविदाकर्मियों के हितों की रक्षा के लिए बड़ा निर्णय लिया। संगठन ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजने का निर्णय लिया है।

कर्मयोगी संगठन के संस्थापक एवं अध्यक्ष गजेंद्र सिंह मंडली की अध्यक्षता में साइंस पार्क, पाली में आयोजित बैठक में जयपुर के एक महिला अस्पताल में कार्यरत संविदाकर्मी दीपक खारवाल की आत्महत्या की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। बैठक की शुरुआत स्वर्गीय दीपक खारवाल को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई।

संगठन के प्रवक्ता प्रबल सिंह मंडली ने बताया कि राजस्थान के विभिन्न सरकारी अस्पतालों से संविदा कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने की खबरों ने हजारों परिवारों को चिंता में डाल दिया है। बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं ने कहा कि वर्षों से बेहद कम मानदेय पर सेवाएं दे रहे संविदाकर्मियों ने कोरोना महामारी जैसे कठिन दौर में अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाओं को संभाला था, लेकिन अब उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बैठक में चर्चा के दौरान संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को अचानक हटाने की स्थिति ने उनमें असुरक्षा, निराशा और मानसिक तनाव को बढ़ा दिया है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनके अनुभव और सेवाओं को देखते हुए सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई सकारात्मक नीति बनाएगी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां उनके लिए चिंताजनक बनी हुई हैं।

कर्मयोगी संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे जाने वाले पत्र में मांग की है कि राजस्थान सरकार को निर्देशित कर वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी संविदा कर्मचारियों को सेवा से नहीं हटाया जाए। साथ ही उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके लिए न्यायसंगत एवं स्थायी नीति बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

संगठन ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के चलते कई परिवार आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कर्मचारियों के हित में निर्णय लेना चाहिए।

बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि संविदाकर्मियों के अनुभव और सेवाओं का उपयोग जनहित में निरंतर किया जाना चाहिए। संगठन ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए लाखों संविदा कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में सकारात्मक पहल करेंगे।

बैठक में संगठन के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे और संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button