जिला जेल में अचानक पहुंची न्यायिक टीम, 98 बंदियों से सीधे जाना हालात का सच

पाली : जिला कारागृह पाली में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और उनकी कानूनी स्थिति की वास्तविक जानकारी लेने के लिए मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम ने आकस्मिक निरीक्षण किया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार तथा सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने जिला कारागृह का निरीक्षण किया।
अचानक हुए इस निरीक्षण के दौरान कारागृह में कुल 98 बंदी निरुद्ध मिले। न्यायिक अधिकारियों ने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं तथा उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार ने बंदियों से बातचीत कर कारागृह में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, पेयजल की उपलब्धता, साफ-सफाई और चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बंदियों से यह भी जाना कि उन्हें किसी प्रकार की समस्या तो नहीं है और उनकी शिकायतों का समाधान किस स्तर पर किया जा रहा है। न्यायिक अधिकारियों ने जेल प्रशासन से भी व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी ली और बंदियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान बंदियों को उनके निःशुल्क विधिक सहायता के अधिकार के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति को केवल इसलिए न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह निजी अधिवक्ता की फीस वहन करने में सक्षम नहीं है।
उन्होंने कहा कि जो बंदी निजी अधिवक्ता करने में असमर्थ हैं, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। किसी व्यक्ति को विधिक सहायता के अभाव में बिना अधिवक्ता के लंबे समय तक निरुद्ध नहीं रहना चाहिए।

निरीक्षण के दौरान ऐसे बंदियों के संबंध में भी जानकारी ली गई, जिनकी जमानत मंजूर हो चुकी है, लेकिन किसी कारणवश वे अभी भी अभिरक्षा में हैं। अधिकारियों ने उनके मामलों की स्थिति तथा न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली।
बंदियों को उनके प्रकरणों की प्रगति, न्यायालय में चल रही कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों के बारे में भी समझाया गया, ताकि वे अपने मामलों की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकें।
न्यायिक टीम ने नवागंतुक बंदियों से भी बातचीत की। इस दौरान उनसे उनके प्रकरणों और कथित अपराध के समय उनकी उम्र के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। निरीक्षण का एक उद्देश्य यह भी रहा कि किसी ऐसे व्यक्ति के मामले में आवश्यक कानूनी सहायता सुनिश्चित की जा सके, जो घटना के समय नाबालिग रहा हो। बंदियों की समस्याएं सुनने के साथ अधिकारियों ने उन्हें उपलब्ध कानूनी विकल्पों और सहायता के बारे में भी जानकारी दी।
बंदियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी निरीक्षण के दौरान जानकारी ली गई। बताया गया कि जिला कारागृह में बंदियों की ओपीडी के दौरान स्वास्थ्य जांच की जाती है। किसी बंदी की तबीयत गंभीर होने अथवा आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उसे उपचार के लिए राजकीय बांगड़ अस्पताल, पाली रेफर किया जाता है। न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जानकारी भी ली।
जिला कारागृह का इस तरह आकस्मिक निरीक्षण बंदियों को उपलब्ध कानूनी एवं मूलभूत सुविधाओं की निगरानी की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने बंदियों से सीधे संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली, जिससे कारागृह में उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को समझने का अवसर मिला।
निरीक्षण के दौरान उप कारापाल जिला कारागृह पाली नरेश कुमार शुक्ला, सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल अल्ताफ हुसैन सहित संबंधित अधिकारी एवं कार्मिक मौजूद रहे।



