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घुमंतू छात्रावास के बालकों ने देखी मेवाड़ की ऐतिहासिक विरासत, दो दिवसीय भ्रमण यात्रा में कुम्भलगढ़ से हल्दीघाटी तक पहुंचे

पाली : डॉ. हेडगेवार स्मृति सेवा प्रन्यास द्वारा संचालित घुमंतू छात्रावास के बालकों के लिए दो दिवसीय ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों की भ्रमण यात्रा शुक्रवार सुबह आयोजित की गई। यात्रा का उद्देश्य छात्रावास में रहने वाले बालकों को राजस्थान की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से रूबरू कराना रहा।

यात्रा को पाली विभाग घुमंतू कार्य प्रमुख दुर्गेश नंदन एवं शिवप्रताप ने भगवा ध्वज दिखाकर रवाना किया। इस दौरान छात्रावास से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। यात्रा को लेकर बालकों में खासा उत्साह नजर आया।

छात्रावास अधीक्षक लालाराम सोलंकी ने बताया कि पाली से बस द्वारा रवाना होने के बाद यात्रा का पहला पड़ाव नाडोल स्थित मां आशापुरा मंदिर रहा। यहां बालकों ने मां आशापुरा के दर्शन किए। इसके बाद यात्रा चारभुजानाथ मंदिर, गढ़बोर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद बालकों को राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर कुम्भलगढ़ किले का भ्रमण कराया गया। किले की ऐतिहासिक संरचना और विरासत के बारे में बालकों ने जानकारी प्राप्त की।

भ्रमण के दौरान बालकों ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक स्थल का भी दर्शन किया। हल्दीघाटी का नाम मेवाड़ के इतिहास और महाराणा प्रताप की वीरता से जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचकर बालकों को इतिहास को केवल पुस्तकों में पढ़ने के बजाय उसके महत्वपूर्ण स्थलों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला।

इसके बाद यात्रा रक्त तलाई पहुंची। यहां भी बालकों ने ऐतिहासिक स्थल का अवलोकन किया। इसके बाद एकलिंगनाथजी के दर्शन किए गए। दिनभर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के भ्रमण के बाद यात्रा उदयपुर पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया।

यात्रा के दूसरे दिन बालकों को उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील का भ्रमण कराया गया। इसके बाद दल जयसमंद झील पहुंचा। राजस्थान की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े इन स्थानों को देखकर बालकों ने उत्साहपूर्वक भ्रमण किया।

इसके पश्चात यात्रा का अगला पड़ाव नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर रहा। यहां सभी ने भगवान श्रीनाथजी के दर्शन किए। धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के दो दिवसीय भ्रमण के बाद यात्रा पुनः पाली लौटकर संपन्न हुई।

छात्रावास अधीक्षक लालाराम सोलंकी ने बताया कि इस प्रकार की ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों की यात्रा हर वर्ष आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य बालकों को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और धार्मिक विरासत की प्रत्यक्ष जानकारी देना है।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्थलों को सामने से देखने से बच्चों में अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति समझ और रुचि विकसित होती है। पुस्तकों में पढ़े गए इतिहास को जब बच्चे वास्तविक स्थलों पर जाकर देखते हैं तो उसका प्रभाव और अधिक गहरा होता है।

दो दिवसीय यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं में उदयपुर, बांसवाड़ा और राजसमंद विभाग के गोपाल कुमार ने सहयोग किया। उन्होंने बालकों के आवास, भोजन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।

इस भ्रमण यात्रा के माध्यम से छात्रावास के बालकों को धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और राजस्थान की गौरवमयी संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिला। यात्रा के दौरान बालकों में उत्साह और सीखने की जिज्ञासा देखने को मिली।

Rajasthan Today

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