google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, पाली में पेयजल संकट से निपटने की तैयारी तेज, टैंकर-बोरिंग से लेकर वैकल्पिक जलस्रोतों का होगा सर्वे

पाली : जिले में इस बार कम बारिश को देखते हुए आने वाले महीनों में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रशासन ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिला कलक्टर की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला कलक्टर कार्यालय के वीसी रूम में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक में पेयजल आपूर्ति, वैकल्पिक जलस्रोत, टैंकरों की उपलब्धता, गिरदावरी, फसल कटाई और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था सहित विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों की समीक्षा की गई।

जिला कलक्टर ने सभी संबंधित जिला स्तरीय एवं ब्लॉक अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कम बारिश के कारण आने वाले समय में पेयजल को लेकर आमजन को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

वीसी बैठक में जिला कलक्टर ने पाली, देसूरी, सुमेरपुर, मारवाड़, सोजत, बाली सहित जिले के सभी क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली। कम बारिश के मद्देनजर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जहां पानी की आवश्यकता अधिक है, वहां पहले से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखी जाए। इसके लिए टैंकर, बोरिंग, तालाब, ट्यूबवेल और अन्य संभावित जलस्रोतों की पहचान कर उनका सर्वे कराया जाए।

जिला कलक्टर ने अधिकारियों से कहा कि आने वाले महीनों में यदि टैंकरों के माध्यम से पेयजल परिवहन की आवश्यकता पड़ती है तो प्रशासन के पास पर्याप्त संख्या में टैंकर उपलब्ध होने चाहिए। इसके लिए अभी से टैंकरों की पहचान, उपलब्धता और सर्वे की तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए गए।

जिला कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाए। जिन क्षेत्रों में जलस्रोत कमजोर हैं या भविष्य में पानी की कमी की आशंका है, वहां वैकल्पिक स्रोतों को पहले से चिन्हित कर कार्ययोजना बनाई जाए।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यही होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर तत्काल पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके और आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

बैठक में गिरदावरी और फसल कटाई की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए फसल कटाई से जुड़े कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा के अनुसार पूरा करने को कहा। कम बारिश के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए अधिकारियों को जमीनी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए।

बैठक में पशुपालन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। जिला कलक्टर ने सभी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को कम बारिश की स्थिति को देखते हुए पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता और आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन को लेकर किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए संबंधित विभाग समय रहते आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करें।

बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश चौधरी ने जानकारी दी कि जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘विकसित भारत-जन सेवा अभियान’ आयोजित किया जाएगा। आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए अभियान के तहत विभिन्न जनसेवा, सामाजिक सरोकार और सुशासन आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

अभियान का उद्देश्य विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ आमजन, किसानों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्यों की दिशा में जनभागीदारी आधारित गतिविधियों को गति दी जाएगी।

अभियान के तहत जिले में अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें—

‘आशीर्वाद का दीया’ — 17 सितंबर को शाम 7 बजे घरों में दीप जलाना।
रक्तदान शिविर — 17 सितंबर।
‘मेरे सपनों का भारत-चित्रसेवा’ — 17 सितंबर से 8 अक्टूबर।
‘नमो सेवा-अनकही कहानियां’ — ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 25 सितंबर तथा शहरी क्षेत्रों में 22 सितंबर से 17 अक्टूबर।
‘आंगन मिलन सेवा’ — 25 से 27 सितंबर।
‘सेवा की कहानी’ — 17 सितंबर से 17 अक्टूबर।
‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ — 7 अक्टूबर।
‘सेवा मेरा योगदान’ — 2 अक्टूबर।
‘सेवा सेतु अभियान’ — ग्रामीण क्षेत्रों में 19 से 25 सितंबर तथा शहरी क्षेत्रों में 8 से 16 अक्टूबर।
‘सेवा के रंग राष्ट्र के संग’ — 24 सितंबर और 11 अक्टूबर।
‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ — 1 से 15 अक्टूबर।
‘सुशासन सेवा संवाद’ — निर्धारित शेड्यूल के अनुसार।

इनके अलावा भी अभियान के तहत विभिन्न जनभागीदारी और जनसेवा आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सीईओ मुकेश चौधरी ने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य, जिला और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारियां तय की गई हैं। जिला स्तर पर जिला कलक्टर संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जिला स्तरीय कार्ययोजना तैयार करवाएंगे।

प्रत्येक गतिविधि के लिए स्पष्ट दायित्व तय किए जाएंगे। अभियान की पहुंच ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, उपखंड, नगरीय निकाय और वार्ड स्तर तक सुनिश्चित की जाएगी।

इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं, नगरीय निकायों, विद्यालय-महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवा समूहों और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

अभियान के दौरान होने वाले कार्यक्रमों में समयबद्ध आयोजन, व्यापक जनभागीदारी, प्रभावी सेवा वितरण और प्रमाणित रिपोर्टिंग पर विशेष जोर रहेगा। प्रशासन का प्रयास रहेगा कि अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा लाभ आमजन तक पहुंचे।

वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक में आईएएस बिरजू गोपाल, अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. बजरंग सिंह, एसीईओ महेन्द्र मेहता सहित पीएचईडी, चिकित्सा, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा सभी ब्लॉक स्तर के अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक से जुड़े।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button