
पाली : जिले के जाडन स्थित विश्व प्रसिद्ध ओम आश्रम में रविवार को आध्यात्मिक इतिहास का एक नया अध्याय जुड़ गया। युवा संत स्वामी अवतार पुरी जी महाराज को महानिर्वाणी अखाड़ा की परंपरा के तहत विधि-विधानपूर्वक महामंडलेश्वर पद पर आसीन किया गया। इस भव्य समारोह में देश-विदेश से आए संत-महात्माओं, योग साधकों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।

वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और संतों के सान्निध्य में सम्पन्न इस आयोजन के साथ ही ओम आश्रम को नया आध्यात्मिक नेतृत्व मिला। महामंडलेश्वर पद को सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है, जो केवल उन्हीं संतों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने वर्षों तक कठोर तप, वेद-शास्त्रों का अध्ययन और समाज सेवा के माध्यम से उच्च आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया हो।
स्वामी अवतार पुरी जी महाराज को यह सम्मान उनके गुरु परमहंस स्वामी महेश्वरानंद पुरी जी महाराज की परंपरा में समर्पण, साधना और सेवा के आधार पर प्रदान किया गया। उन्हें पूर्व में ही उत्तराधिकारी घोषित किया जा चुका था और गुरु के सान्निध्य में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन की मजबूत नींव रखी।

जोधपुर में 18 दिसंबर 1999 को जन्मे स्वामी अवतार पुरी जी का बचपन से ही आध्यात्मिक झुकाव रहा। कम उम्र में ही उन्हें जाडन स्थित ओम आश्रम के गुरुकुल में शिक्षा के लिए लाया गया, जहां उन्होंने वेद, उपनिषद और शास्त्रों का अध्ययन करने के साथ योग और ध्यान में महारत हासिल की। वर्ष 2013 में उन्होंने संन्यास दीक्षा ग्रहण कर सांसारिक जीवन का त्याग करते हुए पूर्ण रूप से सेवा और साधना को समर्पित कर दिया।
संन्यास के बाद उन्होंने आश्रम की विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। बड़े धार्मिक आयोजनों का सफल संचालन, योग-ध्यान का प्रचार और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देकर उन्होंने एक युवा आध्यात्मिक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।

जाडन स्थित ओम आश्रम लगभग 250 एकड़ में फैला विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र है, जो अपने ॐ आकार के मंदिर, योग-ध्यान साधना, वेद अध्ययन, गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों के लिए जाना जाता है। यहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु आध्यात्मिक साधना के लिए पहुंचते हैं।
महामंडलेश्वर पद पर अभिषेक के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। साथ ही सात दिवसीय वैदिक यज्ञ का शुभारंभ भी किया गया, जिसमें विश्व शांति और कल्याण की कामना के साथ निरंतर मंत्रोच्चार हो रहा है।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के निरंतर प्रवाह और आध्यात्मिक विरासत के सशक्त हस्तांतरण का प्रतीक बना। स्वामी अवतार पुरी जी महाराज का यह अभिषेक नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरा है, जो सेवा, साधना और समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देता है।



