‘आओ गांव चले’ अभियान बना बच्चों के लिए खुशियों का संदेश, भामाशाह हसमुखलाल बाफना ने सैकड़ों विद्यार्थियों को बांटी अध्ययन सामग्री

देसूरी : राज्य सरकार के ‘आओ गांव चले’ अभियान के तहत समाजसेवी एवं भामाशाह हसमुखलाल हुक्मीचंद बाफना (नारलाई) ने सोमवार को शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायी पहल करते हुए देसूरी क्षेत्र के विभिन्न राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत सैकड़ों विद्यार्थियों को नोटबुक्स और पेन वितरित किए। अध्ययन सामग्री मिलने से बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक उठी।
कार्यक्रम के दौरान देसूरी क्षेत्र के 11 राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को उनकी कक्षानुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना और शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ाना रहा।
भामाशाह हसमुखलाल बाफना ने कक्षा 1 और 2 के प्रत्येक विद्यार्थी को दो-दो नोटबुक्स, कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों को तीन-तीन नोटबुक्स, जबकि कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को छह-छह नोटबुक्स और पांच-पांच पेन वितरित किए।
इस अवसर पर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय देसूरी, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय क्रमांक-2 एवं 3, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, सेलीमाता (संस्कृत) विद्यालय, मीणा बस्ती, भील बस्ती, कीरो की ढाणी, विरमपुरा रेबरियान, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुमेर तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गुड़ा आसकरण के विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान की गई।

सभी विद्यालयों के संस्थाप्रधानों ने भामाशाह हसमुखलाल बाफना का साफा एवं माला पहनाकर सम्मान किया और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम लोगों के ऐसे सहयोग से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रेरणा मिलती है और शिक्षा का स्तर मजबूत होता है।
वितरण कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विजय सिंह माली, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय देसूरी के प्रधानाचार्य गजेन्द्र सिंह नारलाई, किशोरीलाल दवे, मनोहर सिंह गेहलोत, गुलाब सिंह राणावत, प्रकाश मोबारसा, एडवोकेट राजेन्द्र सिंह गेहलोत सहित अनेक शिक्षक, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समाज की सहभागिता से न केवल विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को भी मजबूती मिलती है। भामाशाह की यह पहल अन्य समाजसेवियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है।



