पाली में किशोर एवं शिशु गृह का औचक निरीक्षण, बालकों से सीधे संवाद कर जानी सुविधाओं की हकीकत

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) पाली के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने गुरुवार को राजकीय सम्प्रेषण एवं किशोर गृह तथा राजकीय शिशु गृह का औचक निरीक्षण कर वहां रह रहे बालकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का गहन जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के साथ बालकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
निरीक्षण के दौरान सचिव भाटी ने बाल गृह में रह रहे विधि से संघर्षरत बालकों के लिए उपलब्ध आवास, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का विस्तार से निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक व्यवस्था की गुणवत्ता पर अधिकारियों से जानकारी ली और आवश्यक सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सचिव विक्रम सिंह भाटी ने बालकों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर यह जाना कि उन्हें गृह में किस प्रकार की सुविधाएं मिल रही हैं। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, दैनिक दिनचर्या, परिवारजनों से मुलाकात, न्यायमित्र द्वारा कानूनी प्रकरणों की जानकारी तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के बारे में भी चर्चा की।
उन्होंने बालकों को शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों में नियमित भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच और शिक्षा ही बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी है।
सचिव भाटी ने बालकों को निःशुल्क विधिक सहायता, उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों तथा बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक बालक को सुरक्षित वातावरण और न्याय पाने का अधिकार है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने गृह परिसर में साफ-सफाई, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श सेवाओं और मैत्रीपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही पालना गृह की स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा बालकों को सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया।
सचिव ने बालकों के मानसिक विकास और मनोरंजन के लिए उपलब्ध इंडोर गेम्स जैसे कैरम, लूडो और सांप-सीढ़ी आदि की भी जानकारी ली और कहा कि ऐसे खेल बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
निरीक्षण के दौरान समन्वयक कन्हैयालाल सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि बाल संरक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी जारी रहेगी, ताकि प्रत्येक बालक को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।



