पाली में साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को भावभीनी श्रद्धांजलि, साहित्य परिषद ने किया शब्दों से स्मरण

पाली : अखिल भारतीय साहित्य परिषद पाली द्वारा पं. विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी सभागार में देश के ख्यातिलब्ध साहित्यकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर साहित्य अर्पण कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर साहित्यकारों, कवियों एवं बुद्धिजीवियों ने उनके साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए उन्हें शब्दों के माध्यम से नमन किया।
जिलाध्यक्ष भंवरसिंह राठौड़ चोटिला ने बताया कि परिषद के संरक्षक गोपीदास रामावत ने विनोद कुमार शुक्ल के शब्दों की उस विलक्षण शक्ति पर प्रकाश डाला, जो सीधे पाठक के भीतर तक पहुंच बनाती है। उन्होंने कहा कि शुक्ल जी का लेखन आत्मा को छूने वाला और मनुष्य की संवेदनाओं से जुड़ा हुआ रहा।
जोधपुर प्रांत प्रचार प्रमुख पवन पाण्डेय ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल साहित्य जगत के प्रेरणापुंज थे। वे भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने के साथ-साथ वर्ष 2023 में पेन-नाबोकोव अंतरराष्ट्रीय साहित्य पुरस्कार के लिए चुने जाने वाले पहले भारतीय-एशियाई लेखक थे। उनका लेखन सत्ता, बाजार या आक्रामक विचारधाराओं से टकराने के बजाय मनुष्य की आंतरिक असुरक्षाओं, करुणा और संवेदनाओं को केंद्र में रखता है। कम शब्दों में गहन अर्थ कह जाना उनकी सबसे बड़ी विशेषता रही।
कार्यक्रम में कवि श्रीराम वैष्णव ‘कोमल’ ने कहा कि शुक्ल जी का जाना ऐसा है जैसे सुबह की पहली किरण का अचानक कमरे तक न पहुंच पाना। कवि दिलीप बच्चानी ने कहा कि उनके उपन्यास, कहानियां और कविताएं यह सिखाती हैं कि बिना क्लिष्ट शब्दों के भी सार्थक और प्रभावशाली साहित्य रचा जा सकता है।
इस अवसर पर नाथूसिंह राजपुरोहित मनवा, मनीषकुमार अनैतिक, सत्यनारायण राजपुरोहित सहित अन्य साहित्यकारों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और विनोद कुमार शुक्ल को भारतीय साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी साहित्यप्रेमियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत साहित्यकार को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साहित्य को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।



