राष्ट्रीय बालिका दिवस पर शर्मनाक तस्वीर: झोंपड़ी में पढ़ने को मजबूर देश का भविष्य, सरकारी दावों की खुली पोल

फलोदी : देश आज राष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहा है, लेकिन आज़ादी के 79 वर्ष बाद भी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रही है। फलोदी जिले की लोहावट तहसील के आमला गांव में संचालित राजकीय प्राथमिक संस्कृत विद्यालय में बच्चे आज भी झोंपड़ी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
विद्यालय में ना बिजली की व्यवस्था है, ना पानी की सप्लाई, इसके बावजूद नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों का पढ़ाई के प्रति जुनून देखने लायक है। कई छात्र-छात्राएं 5 से 7 किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं। यह स्कूल पूरी तरह से स्थानीय ग्रामीणों की मदद से झोंपड़ी में संचालित हो रहा है, जो सरकारी व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

गौरतलब है कि जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं शिक्षा मंत्री हैं, वहीं यह क्षेत्र चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का विधानसभा क्षेत्र भी है। इसके बावजूद गांव के अंतिम छोर तक बेहतर शिक्षा के दावों की हकीकत उजागर हो रही है।
मंत्री खींवसर ने कहा कि पंचायत व शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। यह जानकारी उन्हें समाचार प्लस के माध्यम से मिली है और विद्यार्थियों को जल्द राहत दी जाएगी। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर सामने आई यह तस्वीर एक बार फिर बताती है कि नीतियों और दावों के बीच जमीनी सच्चाई कितनी अलग है, जहां संसाधनों के अभाव में भी बच्चे शिक्षा की लौ जलाए हुए हैं।




