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राजस्थान में UCC का बड़ा असर, लिव-इन रिलेशनशिप पर रजिस्ट्रेशन से लेकर बच्चों के अधिकार तक नए प्रावधान

जयपुर : राजस्थान में समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक-2026 को लेकर तस्वीर अब और स्पष्ट हो गई है। राज्य सरकार की ओर से तैयार किए गए प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार ने 13 अगस्त को विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी और इसे 21 अगस्त को विधानसभा में पेश किया गया।

विधेयक के लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान सबसे अधिक चर्चा में हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़ों को संबंध की शुरुआत और समाप्ति की जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत देनी होगी। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के अधिकारों को कानूनी संरक्षण देना बताया गया है।

प्रस्तावित प्रावधानों में लिव-इन संबंध के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं। यदि संबंध में शामिल दोनों व्यक्तियों में से कोई पहले से विवाहित है, तो ऐसे संबंध के रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं होगी। इसी तरह प्रतिबंधित नातेदारी की श्रेणी में आने वाले संबंधों को भी रजिस्ट्रेशन नहीं दिया जाएगा।

इस प्रावधान का उद्देश्य लिव-इन संबंधों के लिए एक औपचारिक कानूनी ढांचा तैयार करने के साथ-साथ ऐसे संबंधों से जुड़े विवादों और अधिकारों को स्पष्ट करना है।

प्रस्तावित कानून का दायरा केवल राजस्थान में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान के नागरिक यदि राज्य से बाहर रहते हुए लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, तो भी प्रस्तावित प्रावधान उनके संबंध में लागू होने की बात कही गई है। वहीं कुछ श्रेणियों के विदेशी नागरिकों को प्रस्तावित व्यवस्था से अलग रखा गया है।

UCC में लिव-इन संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों के अधिकारों को भी महत्व दिया गया है। प्रस्तावित व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे बच्चों के कानूनी अधिकार प्रभावित न हों।

यानी कानून का फोकस केवल जोड़े के संबंध को दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़े बच्चों के अधिकार और पारिवारिक कानूनी स्थिति को भी स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

Couple looking to the horizon at the shore

प्रस्तावित UCC में लिव-इन रिलेशनशिप के शुरू होने और समाप्त होने की लिखित सूचना अथवा रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था रखी गई है। सरकार की ओर से इसका उद्देश्य संबंध में रहने वाले दोनों पक्षों के अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी स्पष्टता बताया गया है।

राजस्थान UCC का दायरा केवल लिव-इन संबंधों तक सीमित नहीं है। विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण से जुड़े मामलों को भी एक समान कानूनी ढांचे में लाने का प्रस्ताव है। विवाहों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने तथा बहुविवाह पर रोक का भी प्रावधान प्रस्तावित है। विवाह के बाद निर्धारित समय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।

हालांकि अलग-अलग धर्मों और समुदायों को अपनी परंपराओं के अनुसार विवाह करने की स्वतंत्रता जारी रखने का प्रस्ताव है, लेकिन विवाह का कानूनी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित UCC के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (ST) पर लागू नहीं होंगे। संविधान के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाली कुछ श्रेणियों को भी इसके दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है।

UCC के प्रस्तावित प्रावधानों में संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में प्रावधान किए गए हैं। प्रस्तावित कानून में बेटों और बेटियों को समान उत्तराधिकार अधिकार देने तथा बिना वसीयत मृत्यु की स्थिति में उत्तराधिकार का क्रम निर्धारित करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि UCC विधेयक विधानसभा में पेश होने के बाद भी अभी अंतिम कानून नहीं बना है। विधेयक पर सदन में चर्चा, विचार-विमर्श और निर्धारित विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसके अंतिम स्वरूप पर निर्णय होगा। इसलिए लिव-इन रिलेशनशिप सहित सभी प्रावधानों को फिलहाल प्रस्तावित विधेयक के प्रावधान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। 21 अगस्त को विधेयक विधानसभा में पेश हुआ, लेकिन विस्तृत चर्चा बाद की कार्यवाही में होने की संभावना है।

एक नजर में UCC-2026 के प्रमुख प्रस्ताव
लिव-इन रिलेशनशिप की शुरुआत और समाप्ति की सूचना/रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था।
पहले से विवाहित व्यक्ति के साथ लिव-इन संबंध के रजिस्ट्रेशन पर रोक।
प्रतिबंधित नातेदारी वाले संबंधों के रजिस्ट्रेशन पर रोक।
लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा।
विवाह का निर्धारित अवधि में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन।
बहुविवाह पर रोक का प्रस्ताव।
विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार के लिए समान कानूनी ढांचा।
अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित कानून से बाहर रखने का प्रावधान।

यानी राजस्थान का UCC केवल लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्टर करने तक सीमित कानून नहीं है, बल्कि विवाह से लेकर तलाक और संपत्ति के उत्तराधिकार तक व्यक्तिगत कानूनों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने की व्यापक पहल है।

Rajasthan Today

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