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पाली में ‘स्टॉप डायरिया अभियान-2026’ का आगाज, 31 जुलाई तक चलेगा जागरूकता और बचाव अभियान

पाली : बच्चों को डायरिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जिलेभर में मंगलवार से “स्टॉप डायरिया अभियान-2026” का शुभारंभ किया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किए गए इस विशेष अभियान के तहत 16 जून से 31 जुलाई तक व्यापक जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया की रोकथाम, समय पर उपचार और अभिभावकों को जागरूक बनाना है।

जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में अभियान के शुभारंभ अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान अभिभावकों को ओआरएस (ORS) घोल और जिंक के महत्व की जानकारी दी गई तथा बच्चों में दस्त और डायरिया की स्थिति में तत्काल उपचार शुरू करने का संदेश दिया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि डायरिया आज भी बच्चों में बीमारी और मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। हालांकि समय पर ओआरएस घोल और जिंक का उपयोग करने से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग का पूरा फोकस ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने पर रहेगा।

आरसीएचओ डॉ. विजेंद्रपाल सिंह चुंडावत ने बताया कि कार्यक्रमों में चिकित्सा अधिकारियों ने अभिभावकों को डायरिया के लक्षण, बचाव के उपाय और उपचार की जानकारी दी। साथ ही स्वच्छ पेयजल के उपयोग, हाथ धोने की सही आदत, साफ-सफाई और शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी साझा की गई।

अभियान के तहत जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष ORS एवं जिंक कॉर्नर स्थापित किए जाएंगे। यहां जरूरतमंद बच्चों को तत्काल ओआरएस और जिंक उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बीमारी की गंभीरता को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

इसके अलावा आशा सहयोगिनी, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर परिवारों को डायरिया से बचाव और उपचार के बारे में जानकारी देंगी। विशेष रूप से पांच वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को अभियान से जोड़कर उन्हें जागरूक किया जाएगा।

सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने जिले के अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि यदि बच्चों में दस्त, उल्टी या डायरिया जैसे लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही न बरतें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ओआरएस और जिंक का उपयोग बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य इस अभियान के माध्यम से डायरिया के मामलों और उससे होने वाली जटिलताओं में कमी लाना है, ताकि बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बनाया जा सके और बाल मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनजागरूकता, समय पर उपचार और सामुदायिक सहभागिता के जरिए डायरिया जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर जिलेभर में यह विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।

Rajasthan Today

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