पाली : महाराणा प्रताप जयंती की भव्य तैयारियां, जन्मस्थली पर होगा ऐतिहासिक समारोह, शहरभर की रैलियों का होगा स्वागत

पाली : मेवाड़ के गौरव, हिंदुआ सूरज और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती इस वर्ष पाली में विशेष उत्साह और भव्यता के साथ मनाई जाएगी। महाराणा प्रताप की जन्मस्थली मानी जाने वाली जूनी कचहरी, धानमंडी स्थित स्मारक स्थल पर आयोजित होने वाले समारोह को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जन्मस्थली विकास समिति एवं नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में 17 जून को आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को लेकर विभिन्न व्यवस्थाओं की रूपरेखा तय की जा रही है।
महाराणा प्रताप जन्मस्थली विकास समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को जनता कॉलोनी स्थित किड्ज जी स्कूल में समिति अध्यक्ष एडवोकेट शैतानसिंह सोनिगरा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जयंती समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया तथा कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की गई।
समिति सचिव चंपालाल सिसोदिया और सहसचिव रितेश छाजेड़ ने बताया कि समारोह स्थल पर साफ-सफाई, रंग-रोगन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए नगर निगम को पत्र भेजा गया है। जन्मस्थली परिसर को आकर्षक रूप से सजाने और आगंतुकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर शहर के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा निकाली जाने वाली रैलियों एवं शोभायात्राओं का समिति की ओर से जन्मस्थली परिसर में भव्य स्वागत किया जाएगा। इससे कार्यक्रम को व्यापक जनसहभागिता और उत्साह का स्वरूप मिलेगा।
समिति संयोजक उगमराज सांड ने बताया कि समारोह में राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा जल्द घोषित की जाएगी।
बैठक में महाराणा प्रताप जन्मस्थली के संरक्षण और विकास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। समिति पदाधिकारियों ने बताया कि कुछ समय पूर्व पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा, अध्यक्ष एडवोकेट शैतानसिंह सोनिगरा, सचिव चंपालाल सिसोदिया और पूर्व पार्षद विकास बुबकिया ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पाली को राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी “प्रताप सर्किट” योजना में शामिल करने की मांग रखी थी।
समिति का दावा है कि इस संबंध में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं और आने वाले समय में पाली की इस ऐतिहासिक धरोहर के विकास को नई दिशा मिल सकती है। यदि पाली प्रताप सर्किट में शामिल होता है तो पर्यटन, सांस्कृतिक गतिविधियों और स्थानीय विकास को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों और सदस्यों ने महाराणा प्रताप की जन्मस्थली के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और व्यापक विकास के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया। उनका कहना था कि यह स्थल केवल पाली ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बैठक में समिति अध्यक्ष एडवोकेट शैतानसिंह सोनिगरा, संयोजक उगमराज सांड, सचिव चंपालाल सिसोदिया, उपाध्यक्ष अनोपसिंह चौहान, कोषाध्यक्ष प्रकाश शर्मा, सहसचिव रितेश छाजेड़, एडवोकेट कुलदीप सोनिगरा, तरुणसिंह चौहान, महेश बागड़ी, गौतमचंद यति, मुकेश भंसाली, दौलाराम पटेल, पार्षद विकास बुबकिया, राधेश्याम चौहान सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
महाराणा प्रताप जयंती को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है और आयोजन समिति इसे यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियों में जुटी हुई है।



