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पाली में टीबी मरीजों की मदद को आगे आई नायरा एनर्जी, 200 मरीजों को बांटी पोषण किट

पाली : प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी उन्मूलन में जनभागीदारी बढ़ाने और उपचाराधीन मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने की दिशा में पाली जिले में सराहनीय पहल की गई। सामाजिक सरोकार निभाते हुए नायरा एनर्जी लिमिटेड ने निक्षय मित्र के रूप में आगे आकर जिले के 200 टीबी मरीजों को पोषण किट वितरित किए। बुधवार को जिला क्षय निवारण केंद्र, पाली में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम में पाली शहर, पाली ग्रामीण और रोहट क्षेत्र के उपचाराधीन मरीजों को पोषण सामग्री प्रदान की गई।

इस पहल का उद्देश्य टीबी मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यक पोषण उपलब्ध करवाना और उनके स्वास्थ्य में सुधार के प्रयासों को सहयोग देना है। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने कहा कि टीबी के उपचार में दवाइयों के साथ पौष्टिक आहार और समाज का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे प्रयास मरीजों को उपचार जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनके स्वास्थ्य लाभ में मददगार साबित हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत सामाजिक संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, दानदाताओं, भामाशाहों और आमजन को निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में नायरा एनर्जी लिमिटेड ने आगे आकर 200 मरीजों के लिए पोषण किट उपलब्ध करवाए।

कार्यक्रम के दौरान रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन ओम प्रकाश भंडारी, सचिव जिनेन्द्र जैन, उपाध्यक्ष मेघराज बम्ब, प्रोजेक्ट चेयरमैन डॉ. जे.पी. उदावत, नायरा एनर्जी के मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन, पंकज कुमार तथा जिला क्षय निवारण केंद्र पाली के समस्त कार्मिक उपस्थित रहे। अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि टीबी मरीजों को उपचार के साथ पोषण सहायता उपलब्ध करवाना उनके बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विकास मारवाल ने आमजन, कॉरपोरेट सेक्टर, जनप्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों तथा व्यक्तिगत स्तर पर सक्षम भामाशाहों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों की सहायता करने की अपील की।

उन्होंने बताया कि निक्षय मित्र के रूप में टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें अतिरिक्त पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा सकता है। इससे उपचार के दौरान मरीजों को पोषण संबंधी सहयोग मिलेगा और उनके उपचार परिणामों को बेहतर बनाने में योगदान दिया जा सकेगा।

उन्होंने जानकारी दी कि निक्षय मित्र द्वारा गोद लिए गए मरीजों को प्रत्येक माह पोषण किट उपलब्ध करवानी होती है। यह सहायता कम से कम छह माह तक अथवा मरीज की उपचार अवधि पूरी होने तक, दोनों में से जो अवधि बाद में पूरी हो, तब तक जारी रखी जानी है।

कार्यक्रम के अंत में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. उजमा जबीन ने सभी अतिथियों, सहयोगकर्ताओं, चिकित्सा विभाग के कार्मिकों और मरीजों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल चिकित्सा विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और भामाशाहों के सहयोग से उपचाराधीन मरीजों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध करवाई जा सकती है। सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रभावी बनाया जा सकता है।

Rajasthan Today

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