
पाली : भारतीय जैन संघठना पाली चेप्टर के तत्वावधान में धनश्री साधना भवन में आयोजित विशेष कार्यशाला “जबान पे लगाम” में धर्माचार्य आचार्य विजयरत्न सैन सूरीश्वर ने मधुर वाणी, संयमित भाषा और सकारात्मक संवाद के महत्व पर प्रेरणादायी प्रवचन दिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय जैन संघठना पाली चेप्टर के अध्यक्ष अमरचंद बोहरा द्वारा धर्माचार्यों के स्वागत और अभिनंदन से हुई। सचिव बसंत कुमार सोनीमंडिया ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य समाज में सकारात्मक संवाद, मधुर वाणी और पारिवारिक सौहार्द का संदेश फैलाना है।
अपने प्रवचन में आचार्य विजयरत्न सूरीश्वर ने कहा कि जीभ शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो दो कार्य करती है—एक भोजन करना और दूसरा बोलना। उन्होंने कहा कि मधुर वाणी लोगों के दिलों में प्रेम और अपनापन पैदा करती है, जबकि कटु भाषा परिवार और समाज में दरार और संघर्ष का कारण बनती है।

आचार्य ने कहा कि इतिहास और धर्मग्रंथों में भी वाणी के प्रभाव के अनेक उदाहरण मिलते हैं। उन्होंने रामायण और महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बड़े विवादों और संघर्षों के पीछे कटु वचन ही कारण बने। उन्होंने कहा, “छूटा हुआ तीर लौट सकता है, लेकिन जबान से निकला शब्द वापस नहीं आता।”
उन्होंने लोगों को बोलने से पहले दस बार सोचने की सीख देते हुए मधुर और विवेकपूर्ण वाणी के छह महत्वपूर्ण सूत्र बताए। इनमें मधुर भाषा बोलना, उचित समय पर बोलना, किसी का अहित न करना, सत्य वचन बोलना, सोच-समझकर बोलना और गलती होने पर तुरंत क्षमा मांगना शामिल है।
आचार्य ने कहा कि आज समाज में बढ़ते विवादों और तनाव का सबसे बड़ा कारण असंयमित वाणी है। जो व्यक्ति अपनी जबान पर नियंत्रण रखना सीख लेता है, वही जीवन में शांति और आत्मिक सुख प्राप्त कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान “ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोए…” जैसे प्रेरणादायी संदेशों के माध्यम से सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में मूलचंद मदनराज मगराज कानराज संकलेचा परिवार प्रभावना के लाभार्थी रहे।
कार्यक्रम का संचालन बसंत कुमार सोनीमंडिया ने किया। उषा अखावत और दीपमाला सिंघवी ने सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर गौतमचंद जैन, राजेश तलेसरा, जीतू भाई जैन, गौतम सांलेचा, मनीष जैन, हर्ष बोहरा, मुकेश कोठारी, सुशील धारीवाल, राजेंद्र लोढ़ा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।



